गरोठ/पिपलियामंडी। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ थाना पुलिस ने गोवंश तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने गरोठ थाना क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर जांच की, जिसमें क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंस कर 4 बैल वध के लिए ले जाए जा रहे थे। गरोठ में अवैध गोवंश परिवहन (Illegal Cattle Transport in Garoth) के इस मामले में पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई गरोठ थाना प्रभारी (TI) बलवीर सिंह यादव के मार्गदर्शन में गठित पुलिस टीम द्वारा की गई।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी: नाके पर दबोचा गया पिकअप वाहन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गरोठ थाना प्रभारी बलवीर सिंह यादव को मुखबिर से पुख्ता सूचना प्राप्त हुई थी कि एक सफेद रंग के पिकअप वाहन में कुछ लोग अवैध रूप से गोवंश भरकर राजस्थान की सीमा की ओर ले जाने की फिराक में हैं। सूचना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी ने एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया और गरोठ-शामगढ़ मार्ग पर नाकेबंदी के निर्देश दिए।
कुछ ही समय बाद मुखबिर के बताए हुलिए का एक सफेद पिकअप वाहन आता दिखाई दिया। पुलिस टीम को देखकर चालक ने वाहन की गति बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन सतर्क पुलिस बल ने चारों ओर से घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया। जब पुलिस ने वाहन के पिछले हिस्से की तलाशी ली, तो वहां की स्थिति देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। वाहन के भीतर बेहद क्रूरता और अमानवीय तरीके से 4 बैल रस्सियों से जकड़कर ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे। बैलों के मुंह और पैर बांधे गए थे ताकि वे हिल न सकें और न ही कोई आवाज बाहर जा सके।
आरोपियों से पूछताछ: वध के लिए ले जाए जा रहे थे गोवंश
पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर वाहन में सवार आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और न ही उनके पास पशु परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या अनुमति पत्र था। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे इन बैलों को कम दाम में खरीदकर वध हेतु बूचड़खाने ले जा रहे थे। पुलिस ने तुरंत चारों बैलों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया और उन्हें पीने का पानी और चारा उपलब्ध कराया। बैलों को सुरक्षित स्थानीय गौशाला भेज दिया गया है, जहां उनकी देखरेख की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान (Identification of the Accused)
पुलिस ने मौके से पिकअप वाहन में अवैध रूप से गोवंश परिवहन कर रहे तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में की गई है:
- निर्मल भील (उम्र 28 वर्ष): पिता गल्लुभा भाभोर, निवासी बिजोरी बड़ी, थाना पाटन, जिला बांसवाड़ा (राजस्थान)
- गोपाल भील (उम्र 34 वर्ष): पिता जामनुसिंह भरूरया, निवासी मादलदा, थाना थांदला, जिला झाबुआ (मध्य प्रदेश)
- करणसिंह भील (उम्र 20 वर्ष): पिता हुरजी भाभोर, निवासी बाछड़ी फला, थाना पाटन, जिला बांसवाड़ा (राजस्थान)
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है।
आरोपियों के खिलाफ गरोठ पुलिस ने मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अपराध क्रमांक दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पशु क्रूरता और अवैध गोवंश परिवहन के नियमों की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (DAHD) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
[फोटो: गरोठ थाना प्रभारी उपनिरीक्षक बलवीर सिंह यादव, जिनके कुशल मार्गदर्शन में टीम ने की बड़ी कार्रवाई]
थाना प्रभारी बलवीर सिंह यादव के नेतृत्व में कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व गरोठ थाना प्रभारी निरीक्षक बलवीर सिंह यादव ने किया। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही थाना प्रभारी ने क्षेत्र में अवैध गतिविधियों, मादक पदार्थों की तस्करी और गोवंश के अवैध परिवहन के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर रखा है। गरोठ थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की यह कार्रवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में गरोठ क्षेत्र में हुई अन्य प्रशासनिक और कानूनी हलचलों, जैसे गरोठ पुलिस द्वारा जुआ-सट्टा रैकेट पर की गई सट्टा कार्रवाई तथा हाल ही में नवविवाहिता की संदिग्ध मृत्यु के बाद उपजे अस्पताल परिसर में तनाव के मामलों में पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में तत्परता दिखाई थी।
[फोटो: गरोठ थाना पुलिस द्वारा नाकाबंदी में जब्त की गई संदिग्ध पिकअप वाहन]
पशु क्रूरता के खिलाफ कानून और दंडात्मक प्रावधान
मध्य प्रदेश में गोवंश की अवैध तस्करी और वध के मामलों में सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। कानूनन, किसी भी गोवंश को वध के उद्देश्य से परिवहन करना या उसमें सहयोग करना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस कानून के तहत कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है:
| कानून/अधिनियम | अपराध का प्रकार | संभावित सजा | जुर्माना एवं अन्य कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 | गोवंश का वध या अवैध परिवहन | 3 से 7 वर्ष का सश्रम कारावास | न्यूनतम ₹5,000 जुर्माना, वाहन राजसात (Seize) होना |
| पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 | पशुओं को क्रूरतापूर्वक बांधना या ले जाना | जुर्माना और कारावास (बार-बार अपराध पर अधिक सजा) | पशुओं को जब्त कर गौशाला भेजना |
क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने की पुलिस की सराहना
गरोठ पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि पुलिस की मुस्तैदी के कारण मूक पशुओं की जान बच सकी। थाना प्रभारी बलवीर सिंह यादव ने जनता से अपील की है कि यदि क्षेत्र में कहीं भी अवैध गोवंश परिवहन, जुआ-सट्टा या मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हों, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखेगी। मध्य प्रदेश पुलिस की इस प्रकार की जनहितैषी गतिविधियों और नागरिक सेवाओं के लिए आप मध्य प्रदेश पुलिस (MP Police) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर संपर्क कर सकते हैं।
विशेष रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)