हैदराबाद/मंदसौर। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन से जुड़े कानूनी मामले में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। नामपल्ली स्थित एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का हवाला देते हुए संबंधित अर्जी को वापस लौटा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों जैसे सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्यों (MLC) से जुड़े किसी भी कानूनी मामले की सुनवाई का अधिकार इस मजिस्ट्रेट कोर्ट को प्राप्त नहीं है। ऐसे में याचिकाकर्ता को संबंधित विशेष अदालत (Special Court) में अपनी याचिका प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद मीनाक्षी नटराजन याचिका (Sreelatha vs Kumbham Shivakumar Reddy Case) को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आ गया है।

अधिकार क्षेत्र के अभाव में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लौटाया मामला

हैदराबाद के नामपल्ली में एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में “श्रीलता बनाम कुंभम शिवकुमार रेड्डी एवं अन्य” के नाम से दायर निजी याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिका में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का भी नाम शामिल था। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी नियमों के अनुसार, वर्तमान या पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ किसी भी आपराधिक या दीवानी मामले की सुनवाई केवल उनके लिए गठित की गई विशेष अदालतों में ही की जा सकती है।

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मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा, “चूंकि याचिका में नामजद पक्षकारों में जनप्रतिनिधि शामिल हैं, इसलिए इस कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। याचिकाकर्ता कानूनन अधिकृत मंच यानी विशेष अदालत के समक्ष अपनी अर्जी दोबारा लगा सकते हैं।” कानूनी जानकारों के अनुसार, कोर्ट का यह फैसला याचिका के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से अधिकार क्षेत्र और अदालती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ निर्णय है। अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय न्यायपालिका और अदालतों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े नियम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स ऑफ इंडिया (District Courts of India) के पोर्टल पर देख सकते हैं।

क्या है पूरा विवाद और क्यों उछाला गया मीनाक्षी नटराजन का नाम?

इस पूरे मामले की जड़ें तेलंगाना के नारायणपेट जिले के कांग्रेस नेताओं से जुड़ी हुई हैं। कॉरपोरेट जगत की एक पूर्व अधिकारी ए. श्रीलता ने नारायणपेट के पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्ष कुंभम शिवकुमार रेड्डी के खिलाफ एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में शिवकुमार रेड्डी पर छेड़छाड़, आपराधिक धमकी देने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी शिकायत में याचिकाकर्ता श्रीलता ने कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता मीनाक्षी नटराजन पर भी आरोप लगाए थे कि उन्होंने शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया और मामले को दबाने का प्रयास किया। मीनाक्षी नटराजन ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और उनकी छवि खराब करने की साजिश करार दिया था।

राज्यसभा चुनाव के नामांकन निरस्तीकरण से जुड़ा है कनेक्शन

यह मामला हाल ही में तब देशव्यापी सुर्खियों में आया, जब मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किया गया नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी (Returning Officer) द्वारा खारिज कर दिया गया। नामांकन जांच के दौरान विरोधी दल बीजेपी के प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे (Form 26) में हैदराबाद कोर्ट द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस या इस लंबित याचिका की जानकारी छिपाई है।

नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329(ख) के तहत चुनावी प्रक्रिया में बीच में दखल देने से इनकार कर दिया था और याचिका को खारिज कर दिया था। इस संबंध में अधिक विवरण आप पूर्व में प्रकाशित समाचार मीनाक्षी नटराजन सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज की रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। चुनावी कानूनों और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों के बारे में विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारत सरकार के विधायी विभाग (Legislative Department) की वेबसाइट पर उपलब्ध अधिनियमों का संदर्भ ले सकते हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज, आगे क्या होगा?

अब जब हैदराबाद की स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत ने ही इस याचिका को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर वापस लौटा दिया है, तो इससे मीनाक्षी नटराजन के समर्थकों और कांग्रेस खेमे को एक बड़ी नैतिक राहत मिली है। उनका तर्क है कि जिस याचिका के आधार पर उनका राज्यसभा का नामांकन निरस्त किया गया, वह याचिका ही उचित मंच पर नहीं थी। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि याचिकाकर्ता ए. श्रीलता इस मामले को सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत में ले जाती हैं या नहीं।

इस कानूनी घटनाक्रम का असर मध्य प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों की राजनीति पर पड़ना तय है। मंदसौर क्षेत्र की अन्य हलचलों और कृषि क्षेत्र की जानकारी जैसे हालिया नीमच मंडी भाव तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े भावगढ़ पुलिस लाइन-अटैच विवाद जैसी खबरों को भी आप हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं। देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए जाने वाले ऐतिहासिक फैसलों के अध्ययन के लिए आप सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (Supreme Court of India) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।


विशेष कानूनी रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)

कैलाश विश्वकर्मा