मंदसौर (Mandsaur): पुलिस महकमे में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में मंदसौर पुलिस अधीक्षक (SP) श्री विनोद कुमार मीणा ने एक और सख्त कदम उठाया है। भावगढ़ थाने में पदस्थ दो आरक्षकों के खिलाफ गंभीर कदाचार, मारपीट और तोड़फोड़ की शिकायत मिलने पर एसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग की छवि को स्वच्छ बनाए रखने और पुलिसकर्मियों के मनमाने रवैये पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है। प्रथम दृष्टया जांच में दोनों आरक्षकों का आचरण गंभीर रूप से अमर्यादित पाया गया, जिसके बाद एसपी ने उनके निलंबन का लिखित आदेश जारी किया।

निलंबित किए गए आरक्षकों के नाम आरक्षक क्रमांक 846 दशरथ धनगर और आरक्षक क्रमांक 354 धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया हैं। दोनों आरक्षक मंदसौर जिले के भावगढ़ थाने के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात थे। निलंबन अवधि के दौरान दोनों आरक्षकों को रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) मंदसौर से संबद्ध किया गया है। विभाग द्वारा उनके निलंबन आदेश की प्रति रतलाम रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) सहित जिला स्तर के आला अधिकारियों को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा द्वारा भावगढ़ थाने के दो आरक्षकों के निलंबन का आधिकारिक आदेश पत्र

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विवरण: मंदसौर एसपी कार्यालय से जारी निलंबन आदेश की आधिकारिक प्रति।

नांदवेल बॉर्डर स्थित मातेश्वरी ढाबे पर हुई थी मारपीट व तोड़फोड़

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 9 और 10 जून 2026 की दरमियानी रात का है। भावगढ़ थाने में पदस्थ आरक्षक दशरथ धनगर और धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया राजस्थान बॉर्डर पर स्थित नांदवेल पहुंचे थे। वहां स्थित मातेश्वरी ढाबे पर दोनों आरक्षकों का ढाबा संचालक महिपाल सिंह के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरक्षकों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ढाबा संचालक के साथ जमकर मारपीट की और ढाबे के भीतर तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया।

घटना के बाद आरोपियों द्वारा पीड़ित ढाबा संचालक पर मामले को रफा-दफा करने और राजीनामा (समझौता) करने के लिए अनुचित दबाव भी बनाया जा रहा था। इस पूरी घटना की शिकायत सोशल मीडिया और अन्य सूत्रों के माध्यम से मंदसौर एसपी तक पहुंची। सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों द्वारा इस प्रकार के कृत्य किए जाने को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसपी ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए।

अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) को 5 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

एसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश पत्र (क्रमांक पुअ/मंद/निस/3697/2026) के तहत इस पूरे मामले की गहन और विधिवत जांच अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) मंदसौर ग्रामीण को सौंपी गई है। एसपी ने निर्देश दिए हैं कि एसडीओपी स्वयं मौके पर जाकर और दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और अगले 5 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत करें।

यदि विस्तृत जांच रिपोर्ट में आरक्षकों के खिलाफ लगे आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ विभागीय सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी या अन्य कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। निलंबन की इस अवधि में दोनों आरक्षकों को नियम अनुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा और वे बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के मंदसौर मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

पुलिस निलंबन की कानूनी प्रक्रिया और नियम

पुलिस विभाग में किसी भी कर्मचारी का निलंबन (Suspension) कोई अंतिम सजा नहीं होती, बल्कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके सबूतों या गवाहों को प्रभावित न कर सके। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन की यह कार्रवाई की जाती है।

निलंबन अवधि के दौरान पुलिसकर्मी को उनके कर्तव्य से मुक्त रखा जाता है, लेकिन वे विभाग के अधीन ही बने रहते हैं। उन्हें दैनिक रूप से रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। इस अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाता है, जो सामान्यतः उनके मूल वेतन का आधा (50%) होता है, साथ ही उस पर देय महंगाई भत्ता भी शामिल होता है। यदि विभागीय जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो कर्मचारी को ससम्मान बहाल कर दिया जाता है और निलंबन अवधि का बकाया वेतन भी प्रदान किया जाता है।

पीड़ित ढाबा संचालक और प्रत्यक्षदर्शियों की भूमिका

भावगढ़ थाने के इस मामले में जांच अधिकारी (SDOP) के लिए ढाबा संचालक महिपाल सिंह और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों (जैसे ढाबे के कर्मचारी और ग्राहक) के बयान सबसे महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस टीम नांदवेल स्थित मातेश्वरी ढाबे का मौका मुआयना करेगी और यदि ढाबे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो उनकी फुटेज भी साक्ष्य के रूप में जब्त की जाएगी।

मारपीट के आरोपों की पुष्टि के लिए पीड़ित महिपाल सिंह का मेडिकल परीक्षण भी कराया जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान यह स्पष्ट करेंगे कि विवाद की शुरुआत किस बात पर हुई थी और क्या आरक्षकों ने वर्दी के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए ढाबा संचालक को धमकाया था। इसके अतिरिक्त, राजीनामा (समझौता) करने के लिए बनाए जा रहे दबाव के कॉल रिकॉर्ड्स या अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।

अनुशासनहीनता और कदाचार पर एसपी का सख्त रुख

मंदसौर जिले की कमान संभालने के बाद से ही एसपी विनोद कुमार मीणा लगातार पुलिस बल में अनुशासन और कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुलिस जनता की सुरक्षा और सहायता के लिए है, न कि उनके साथ अभद्रता या मारपीट करने के लिए। वर्दी का रौब दिखाकर आम नागरिकों या व्यवसायियों को परेशान करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब मंदसौर पुलिस प्रशासन ने अपने ही कर्मियों पर गाज गिराई हो। इससे पहले भी विभागीय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में एसपी विनोद कुमार मीणा कड़ा रुख अपना चुके हैं। कुछ समय पूर्व सीबीएन (CBN) की कार्रवाई के बाद एसपी ने कचनारा चौकी प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभाग में कड़ा संदेश दिया था।

सीमावर्ती क्षेत्रों (बॉर्डर) पर सुरक्षा और पारदर्शिता की चुनौती

नांदवेल क्षेत्र मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित है। सीमावर्ती इलाके होने के कारण यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, जहाँ से भारी मात्रा में मालवाहक वाहनों और यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। यदि बॉर्डर पर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के बजाय पुलिसकर्मी स्वयं ढाबा संचालकों या स्थानीय लोगों के साथ विवाद, तोड़फोड़ और राजीनामे के खेल में शामिल होंगे, तो इससे पुलिस की छवि खराब होती है।

मंदसौर पुलिस प्रशासन वर्तमान में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ भी एक व्यापक अभियान चला रहा है, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा चौकियों को चुस्त-दुरुस्त रखा जा रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में आरक्षकों द्वारा ढाबे पर की गई यह अनुशासनहीनता विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही थी, जिसे देखते हुए एसपी ने त्वरित निलंबन का फैसला लिया।

जनसुनवाई के माध्यम से आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण

पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीणा का मानना है कि आम जनता की शिकायतों का समय पर निराकरण होना आवश्यक है। इसी सोच के तहत मंदसौर जिला पुलिस कंट्रोल रूम में जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है। हाल ही में आयोजित मंदसौर पुलिस की जनसुनवाई में 73 शिकायतें सुनी गईं थीं, जहाँ एसपी ने व्यक्तिगत रूप से फरियादियों से मिलकर मौके पर ही उनकी समस्याओं का विधिसंगत निराकरण करने हेतु संबंधित थाना प्रभारियों को कड़े निर्देश दिए थे।

इस जनसुनवाई व्यवस्था से आम नागरिकों का पुलिस प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है, क्योंकि पीड़ित सीधे जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी तक अपनी बात बिना किसी हिचक के पहुंचा पा रहे हैं। भावगढ़ थाने के दोनों आरक्षकों के खिलाफ की गई यह निलंबन की त्वरित कार्रवाई भी इसी जवाबदेही और जन-केंद्रित कार्यशैली का परिणाम मानी जा रही है।

गरोठ थाने के दो प्रधान आरक्षक भी किए गए लाइन हाजिर

भावगढ़ थाने के दो आरक्षकों को निलंबित करने के साथ ही मंदसौर पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीणा ने एक और बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। जारी आदेश (क्रमांक/पुअ/मंदसौर/स्थापना/3698/2026, दिनांक 10/06/2026) के अनुसार, गरोठ थाने में पदस्थ दो कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को प्रशासनिक कार्य सुविधा की दृष्टि से तत्काल प्रभाव से गरोठ थाने से हटाकर पुलिस लाइन (रक्षित केंद्र) मंदसौर संबद्ध (लाइन हाजिर) किया गया है।

लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में कार्यवाहक प्रधान आरक्षक क्रमांक 464 अजय प्रजापति और कार्यवाहक प्रधान आरक्षक क्रमांक 157 सुनील सोलंकी शामिल हैं। एसपी ने गरोठ थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि वे दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल कार्यमुक्त कर पुलिस लाइन मंदसौर के लिए रवाना करें और दोनों को निर्देशित करें कि वे नवीन स्थापना स्थल पर तत्काल अपनी आमद दर्ज कराएं।

मंदसौर एसपी द्वारा गरोठ थाने के दो प्रधान आरक्षकों को लाइन हाजिर करने का आदेश

विवरण: एसपी कार्यालय मंदसौर द्वारा गरोठ थाने के पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करने का आदेश पत्र।

विशेष बात यह है कि लाइन हाजिर किए गए कार्यवाहक प्रधान आरक्षक सुनील सोलंकी (क्र. 157) हाल ही में हुए एक बड़े मामले के जांच अधिकारी थे। उन्होंने ही 9 जून 2026 को गरोठ थाना क्षेत्र के बोलिया रोड श्मशान घाट के पास दबिश देकर आरोपी रामगोपाल खाती को सट्टा लिखते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने सट्टा अंक पर्ची और नगदी बरामद की थी। इस सट्टा कार्रवाई के तुरंत बाद जांच अधिकारी सुनील सोलंकी को गरोठ थाने से हटाकर पुलिस लाइन मंदसौर भेजने की इस त्वरित कार्रवाई से स्थानीय पुलिस हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इस पूर्व सट्टा गिरफ्तारी की विस्तृत रिपोर्ट आप हमारी खबर गरोठ पुलिस की कार्रवाई: सट्टा लिखते पकड़ा गया सटोरिया में पढ़ सकते हैं।


कैलाश विश्वकर्मा

कैलाश विश्वकर्मा

मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)

कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और स्थानीय शासन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं.

– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया

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