नई दिल्ली/मंदसौर। कांग्रेस की कद्दावर नेता और मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी (Rajya Sabha Nomination) खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने शुक्रवार (12 जून 2026) को कांग्रेस नेता की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायपालिका इसमें दखल नहीं दे सकती।
संविधान के अनुच्छेद 329(ख) का हवाला देकर याचिका खारिज
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 329(ख) (Article 329(b) of the Constitution) का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि एक बार जब चुनाव अधिकारी (Returning Officer) द्वारा नामांकन पत्र खारिज कर दिया जाता है और चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है, तो चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक अदालतें रिट याचिका के माध्यम से इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को यह राहत दी है कि वे चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के तहत कानूनन चुनाव याचिका (Election Petition) दायर कर सकती हैं। कानूनी प्रावधानों और नियमों की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारत सरकार के विधायी विभाग (Legislative Department) की आधिकारिक साइट पर जाकर चुनाव संबंधी नियमों को देख सकते हैं।
बीजेपी की आपत्ति के बाद खारिज हुआ था नामांकन
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना पर्चा दाखिल किया था। लेकिन नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रतिनिधि ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। आपत्ति में कहा गया था कि कांग्रेस नेता ने अपने हलफनामे (Form 26) में अधूरी जानकारी दी है और उनके खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले का खुलासा नहीं किया है।
इन आरोपों और दस्तावेजों की जांच के बाद चुनाव अधिकारी (Returning Officer) ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेता ने तत्काल सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी। मीनाक्षी नटराजन का संसदीय क्षेत्र मंदसौर रहा है, जहाँ हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर कई हलचलें हुई हैं, जैसे मंदसौर एसपी द्वारा लिया गया भावगढ़ एवं गरोठ पुलिस कार्रवाई का निर्णय।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?
मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस पार्टी की बेहद वरिष्ठ और राहुल गांधी की करीबी नेताओं में गिनी जाती हैं। उनके राजनीतिक जीवन की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- छात्र राजनीति से शुरुआत: 1990 के दशक में उन्होंने एनएसयूआई (NSUI) से राजनीति की शुरुआत की और 1999 में इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
- युवा कांग्रेस की कमान: 2002 में उन्हें मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।
- संसदीय सफर: उन्होंने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मंदसौर संसदीय सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और 2014 तक सांसद रहीं। मंदसौर क्षेत्र की अन्य गतिविधियों जैसे नीमच मंडी की फसल कीमतों की जानकारी के लिए आप नीमच मंडी भाव की रिपोर्ट देख सकते हैं।
- संगठनात्मक जिम्मेदारियां: वर्तमान में वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में तेलंगाना राज्य की प्रभारी के रूप में कार्य कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए होने वाले चुनावों का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। कांग्रेस को अब अपनी आगे की रणनीति पर विचार करना होगा। इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनावी फैसलों में जल्दबाजी में बदलाव नहीं कराया जा सकता और चुनाव याचिका ही एकमात्र कानूनी विकल्प है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की दैनिक सूची और आदेशों की प्रतियों के लिए आप सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (Supreme Court of India) की वेबसाइट देख सकते हैं।
विशेष रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)