कोटा (Kota): पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के लिए 16 मई 2026 का दिन गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि का दिन रहा। भारतीय रेल की स्वदेशी तकनीक और वैश्विक इंजीनियरिंग के समन्वय से निर्मित नई 16-कार वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ट्रेनसेट ने ‘कोटा मंडल वंदे भारत ट्रायल’ (Kota Division Vande Bharat Trial) के अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। रेल कोच फैक्ट्री (RCF), कपूरथला द्वारा निर्मित इस अत्याधुनिक ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार को छूकर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध की है।

21 दिनों तक चला सघन परीक्षण

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन के अनुसार, यह परीक्षण श्रृंखला 27 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी और लगातार 21 दिनों तक कोटा मंडल के विभिन्न रेल खंडों पर संचालित रही। आरडीएसओ (RDSO) लखनऊ के विशेषज्ञों की देखरेख में ट्रेन को विभिन्न परिस्थितियों जैसे आर्द्र और शुष्क ट्रैक, वक्राकार मार्गों और अलग-अलग लोडिंग अवस्थाओं में परखा गया।

यह भी पढ़ें: रतलाम-नीमच रेलखंड दोहरीकरण का तोहफा: ट्रेनों के समय में बड़ा बदलाव, यात्रियों के बचेंगे हर दिन 55 मिनट; देखिए नया टाइम-टेबल

Advertisement

Vande Bharat Train Kota Trial

कोटा मंडल में 180 किमी/घंटा की रफ़्तार पर वंदे भारत ट्रेन का सफल परीक्षण

यह भी पढ़ें: कोटा-नागदा रेलखंड: दरा सेक्शन में आरयूबी (RUB) निर्माण कार्य के तहत डाउन लाइन पर आरएच गर्डर की सफल लॉन्चिंग

अत्याधुनिक तकनीकी मानकों पर खरी उतरी ट्रेन

परीक्षण के दौरान 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति पर आपातकालीन ब्रेकिंग दूरी (EBD), थर्मल क्षमता और विजीलेंस कंट्रोल डिवाइस (VCD) जैसे महत्वपूर्ण मानकों का परीक्षण किया गया। कोटा-चौमहला-रवांजना डूंगर खंड पर ट्रेन ने अपनी पूरी रफ़्तार का प्रदर्शन किया। अल्सटॉम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड की प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) ने परीक्षण के हर चरण में उत्कृष्ट परिणाम दिए।

Vande Bharat Driver Cab

यह भी पढ़ें: Indian Railways New Logo: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने बदला अपना आधिकारिक लोगो, अब 17 नहीं बल्कि 18 सितारों से चमकेगा रेलवे का प्रतीक चिह्न, जानिए इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह

परीक्षण के दौरान ड्राइवर केबिन में मौजूद लोको पायलट और तकनीकी टीम

कोटा मंडल की टीम का सराहनीय योगदान

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कोटा मंडल के अनुभवी लोको पायलट श्री विपिन कुमार सिंह, सहायक लोको पायलट श्री हरनाम सिंह, मुख्य लोको निरीक्षक श्री वाई. के. शर्मा और उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह सफल ट्रायल भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भरता और अर्ध-उच्च गति (Semi-High Speed) परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की ओर ले जाएगा।

रेलवे और आपके शहर की ऐसी ही ताज़ा और महत्वपूर्ण खबरों के लिए ‘यशस्वी दुनिया’ के साथ जुड़े रहें।

कैलाश विश्वकर्मा