जावरा (Jaora): रतलाम जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भीमाखेड़ी गांव में बुधवार देर रात पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़ी नकली दूध की फैक्ट्री (Fake Milk Factory) का भंडाफोड़ किया है। मुखबिर की सूचना पर जावरा औद्योगिक थाना पुलिस ने इस अवैध कारखाने पर अचानक छापेमारी की, जहां बड़े पैमाने पर घटिया किस्म के मिल्क पाउडर, डिटर्जेंट, यूरिया और घातक रसायनों (केमिकल्स) का उपयोग कर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। पुलिस की इस दबिश के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और फैक्ट्री में काम करने वाले कई लोग भागने की फिराक में थे, जिन्हें पुलिस ने मुस्तैदी से घेर लिया।

पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारखाने से हर रोज हजारों लीटर सिंथेटिक और नकली दूध तैयार कर आसपास के क्षेत्रों सहित राजस्थान सीमा पर स्थित डेयरियों और होटलों में सप्लाई किया जा रहा था। कार्रवाई के तुरंत बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (खाद्य विभाग) की टीम को भी मौके पर बुला लिया। फिलहाल जावरा औद्योगिक थाना प्रभारी (TI) और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद है और सघन जब्ती व जांच की कार्रवाई जारी है।

जावरा के भीमाखेड़ी में नकली दूध की फैक्ट्री पर पुलिस और खाद्य विभाग की छापेमारी

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विवरण: भीमाखेड़ी स्थित नकली दूध बनाने वाले कारखाने में भारी मात्रा में जब्त किए गए उपकरण और जांच करते पुलिस व खाद्य विभाग के अधिकारी।

नकली दूध की फैक्ट्री में छापेमारी: पूरी कार्रवाई का विवरण

जावरा औद्योगिक थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि भीमाखेड़ी के एक सुनसान बाड़ेनुमा परिसर में अवैध रूप से रासायनिक पदार्थों की मदद से दूध का निर्माण किया जा रहा है। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल ने जब मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी, तो वहां बड़ी-बड़ी टंकियां, मिक्सर मशीनें, इलेक्ट्रिक हीटर और भारी मात्रा में मिल्क पाउडर के खाली व भरे हुए कट्टे बरामद हुए।

मौके पर पुलिस को सिंथेटिक दूध बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाले रसायनों की बोतलें और डिटर्जेंट पाउडर के पैकेट भी मिले हैं। पुलिस टीम ने तत्काल इसकी सूचना रतलाम जिला खाद्य विभाग को दी, जिसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम तुरंत भीमाखेड़ी पहुंची। दोनों विभागों की इस संयुक्त टीम ने कारखाने से तैयार दूध, मिल्क पाउडर, रसायनों और पानी के मिश्रण के नमूने (सैंपल्स) जब्त किए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला (लैब) में परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पाउडर और डिटर्जेंट से ज़हर बनाने का खेल: कैसे बनता था नकली दूध?

फैक्ट्री में हो रहे इस अवैध कारोबार की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली है। अधिकारियों के अनुसार, मुनाफाखोर शुद्ध दूध की जगह पर पानी में सस्ता मिल्क पाउडर घोलते थे। इसके बाद दूध को गाढ़ा दिखाने और उसमें प्राकृतिक दूध जैसा झाग (फ्रोथ) लाने के लिए वाशिंग पाउडर (डिटर्जेंट) या शैम्पू मिलाया जाता था। वहीं फैट की मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें रिफाइंड सोयाबीन तेल या सिंथेटिक ऑयल और यूरिया का खतरनाक घोल डाला जाता था।

यह सिंथेटिक मिश्रण दिखने में पूरी तरह असली दूध जैसा गाढ़ा और सफेद हो जाता था, जिसे सामान्य रूप से पहचान पाना नामुमकिन था। इस तरह के रासायनिक दूध को तैयार करने की लागत बेहद कम आती है, लेकिन इसे बाजार में असली दूध के दामों पर बेचकर हर दिन लाखों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया जा रहा था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डिटर्जेंट और यूरिया युक्त यह नकली दूध सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, जो धीरे-धीरे मानव शरीर को मौत के मुंह में धकेलता है।

सिंथेटिक दूध के सेवन से सेहत पर गंभीर खतरे

चिकित्सकों का कहना है कि केमिकल और यूरिया से बना यह सिंथेटिक दूध इंसानी शरीर के लिए अत्यंत घातक और ज़हर समान है। इसके नियमित या अल्पकालिक सेवन से निम्नलिखित गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:

  • लिवर और किडनी फेलियर: दूध में मिलाया जाने वाला यूरिया और डिटर्जेंट सीधे तौर पर लिवर की कार्यप्रणाली को नष्ट कर देता है और किडनी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करता है, जिससे डायलिसिस की नौबत आ जाती है।
  • कैंसर का खतरा: सिंथेटिक दूध में प्रयुक्त होने वाले कई रासायनिक तत्व कैंसरजन्य (कार्सिनोजेनिक) होते हैं, जो शरीर में ट्यूमर और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म देते हैं।
  • पेट व आंतों में संक्रमण: इस रासायनिक दूध के सेवन से पेट में अल्सर, आंतों में गंभीर संक्रमण और पाचन तंत्र पूरी तरह खराब हो जाता है। बच्चों में इसके दुष्प्रभाव और भी अधिक तीव्र तथा जानलेवा हो सकते हैं।

रतलाम व मंदसौर क्षेत्र में पुलिस व प्रशासन की मुस्तैदी

रतलाम जिले के जावरा में नकली खाद्य पदार्थों के खिलाफ पुलिस की इस बड़ी छापेमारी को जिला प्रशासन की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। हाल ही में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को मजबूत करने के लिए रतलाम जिले में रतलाम जिले में पुलिस अधीक्षक अमित कुमार द्वारा किए गए बड़े पुलिस तबादले किए गए थे, जिसके बाद से ही जिले के सभी थाना क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों और मिलावटखोरों पर पुलिस लगातार नज़र रख रही है।

इसी प्रकार, पड़ोसी मंदसौर जिले में भी पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा द्वारा पुलिसकर्मियों पर की गई सख्त निलंबन एवं लाइन हाजिर की कार्रवाई काफी चर्चा में रही थी। पुलिस विभाग की यह सजगता हर मोर्चे पर दिख रही है, चाहे वह खाद्य मिलावटखोरों के खिलाफ हो या फिर शामगढ़ पुलिस द्वारा मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई जैसी कोई बड़ी ड्रग जब्ती हो।

भीमाखेड़ी में नकली दूध के इस कारखाने पर कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद फैक्ट्री संचालक और इसमें शामिल मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कारखाने से नकली दूध किन-किन शहरों और डेयरियों में भेजा जाता था, ताकि वहां भी छापेमारी कर मिलावटी दूध को नष्ट किया जा सके और आम जनता को इस ज़हर से बचाया जा सके।


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कैलाश विश्वकर्मा

कैलाश विश्वकर्मा

मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)

कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और स्थानीय शासन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं.

– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया

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