मंदसौर: विश्व मगरमच्छ दिवस (World Crocodile Day) के अवसर पर गांधीसागर बांध के बैकवाटर और चंबल नदी क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद दृश्य सामने आया है। यहां एक मादा मगरमच्छ अपने नन्हें बच्चों के साथ धूप सेंकती दिखाई दी, जिसने वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक जीवन चक्र की ओर लोगों का ध्यान तेजी से आकर्षित किया है।
मगरमच्छों का प्रजनन चक्र (Reproduction Cycle)
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मगरमच्छों का प्रजनन चक्र हर वर्ष मार्च और अप्रैल माह में शुरू होता है। इस दौरान नर और मादा मगरमच्छ का मिलन होता है। इसके बाद मई और जून की भीषण गर्मी में मादा मगरमच्छ नदी और जलाशयों के किनारे सुरक्षित रेत में गहरे गड्ढे बनाकर घोंसला तैयार करती है और उसमें लगभग 25 से 30 अंडे देती है।
अंडों की निगरानी और मातृत्व
अंडे देने के बाद मादा मगरमच्छ उन्हें रेत से ढंक देती है और करीब 50 से 60 दिनों तक लगातार उनकी कड़ी निगरानी करती है। इस अवधि में वह अपने अंडों की सुरक्षा के लिए बेहद सतर्क और आक्रामक हो जाती है। जंगली जानवरों, शिकारी पक्षियों और अन्य खतरों से अंडों को बचाने के लिए मादा मगरमच्छ घोंसले के आसपास दिन-रात पहरा देती रहती है।
मानसून में अंडों से निकलते हैं नन्हें बच्चे
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून की शुरुआत और जुलाई माह में होने वाली पहली बारिश के साथ ही अंडों से नन्हें मगरमच्छ बाहर निकलना शुरू करते हैं। इस दौरान मां मगरमच्छ अपने बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी निभाती है। वह बच्चों को बेहद सावधानी से अपने जबड़ों में उठाकर पानी की सुरक्षित धारा तक पहुंचाती है, जो वन्यजीव जगत में मातृत्व का अनोखा उदाहरण माना जाता है।
गांधीसागर और चंबल क्षेत्र: मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास
गांधीसागर और चंबल क्षेत्र मगरमच्छों के प्राकृतिक आवास के रूप में देश में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां समय-समय पर मगरमच्छों की ऐसी अद्भुत गतिविधियां देखने को मिलती हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि नदी या जलाशयों के किनारे मगरमच्छ और उनके बच्चे दिखाई दें तो उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। विश्व मगरमच्छ दिवस पर चंबल किनारे मादा मगरमच्छ और उसके नन्हें बच्चों का यह दृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)