
मंदसौर जिले के गरोठ क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के अचानक लापता होने से शुरू हुई कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे मामले को किसी क्राइम थ्रिलर जैसा बना दिया। एक ओर परिवार की चिंता और बेबसी थी, तो दूसरी ओर पुलिस की लगातार मेहनत, तकनीकी जांच और धैर्य—इन सबके बीच आखिरकार वह पल आया जब हजारों किलोमीटर दूर उड़ीसा से बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य गुमशुदा बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित वापस लाना है।


घटना की शुरुआत 27 अप्रैल 2025 को हुई, जब गरोठ थाना क्षेत्र के बंजारी गांव के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अचानक घर से लापता होने की सूचना पुलिस को दी। परिजनों के मुताबिक, बालिका बिना किसी को बताए अपने भाई के घर बासगोन से कहीं चली गई थी। शुरुआत में यह एक सामान्य गुमशुदगी का मामला लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार की चिंता बढ़ती चली गई। पुलिस ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराध क्रमांक 172/2025, धारा 137(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
थाना प्रभारी उनि बलवीरसिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने इस केस को प्राथमिकता पर लेते हुए हर संभावित एंगल से जांच शुरू की। शुरुआत में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। न कोई चश्मदीद, न कोई स्पष्ट दिशा—बस एक सवाल कि आखिर बालिका कहां गई? ऐसे में पुलिस ने तकनीकी और डिजिटल जांच का सहारा लिया। मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला गया। यही वह मोड़ था, जहां से कहानी ने नया रुख लिया।

जांच के दौरान एक अहम सुराग मिला—बालिका के मोबाइल की लोकेशन मध्यप्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ीसा की ओर इशारा कर रही थी। यह जानकारी चौंकाने वाली थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। बिना समय गंवाए थाना प्रभारी ने एक विशेष टीम गठित की, जिसमें सउनि बलवानसिंह देवड़ा, सउनि मीना राठौर, प्रधान आरक्षक मानसिंह भाटी, आरक्षक संजय बम्बोरिया और साइबर सेल मंदसौर के प्रधान आरक्षक मुजफरउद्दीन को शामिल किया गया।
टीम को तुरंत उड़ीसा रवाना किया गया। यह सफर आसान नहीं था—लंबी दूरी, अनजान राज्य, अलग भाषा और सीमित जानकारी। लेकिन टीम का लक्ष्य साफ था—बालिका को हर हाल में सुरक्षित वापस लाना। कई दिनों की खोजबीन, स्थानीय इनपुट और तकनीकी ट्रैकिंग के बाद टीम उड़ीसा के मलखानगिरी इलाके तक पहुंची। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी।
आखिरकार, लगातार प्रयासों के बाद वह क्षण आया जब पुलिस ने सटीक लोकेशन पर पहुंचकर बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया। उस पल ने न सिर्फ परिवार को राहत दी, बल्कि पुलिस की मेहनत को भी सार्थक बना दिया। बालिका को तुरंत पुलिस अभिरक्षा में लेकर सुरक्षित गरोठ लाया गया, जहां परिजनों की आंखों में खुशी और राहत साफ झलक रही थी।
पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीणा के निर्देशन में कार्य हुआ, जबकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती हेमलता कुरील और एसडीओपी श्री विजय कुमार यादव का मार्गदर्शन लगातार टीम को मिलता रहा। यह समन्वय और नेतृत्व ही था, जिसने इस जटिल मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फिलहाल पुलिस बालिका और उसके परिजनों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह किन परिस्थितियों में वहां पहुंची और इसके पीछे कोई साजिश या अन्य पहलू तो नहीं है। जांच अभी जारी है और पुलिस हर एंगल को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और टीम समर्पित हो, तो कोई भी दूरी या चुनौती बड़ी नहीं होती। गरोठ पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन है, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए एक उम्मीद भी है, जिनके अपने किसी कारणवश उनसे दूर हो जाते हैं।
इस सराहनीय कार्य में थाना प्रभारी उनि बलवीरसिंह यादव, सउनि बलवानसिंह देवड़ा, सउनि मीना राठौर, प्रधान आरक्षक मानसिंह भाटी, आरक्षक संजय बम्बोरिया और साइबर सेल के प्रधान आरक्षक मुजफरउद्दीन की अहम भूमिका रही। उनकी सतर्कता, सूझबूझ और साहस ने इस कहानी को एक सुखद अंत तक पहुंचाया।