पिपलियामंडी (मंदसौर)। यह दृश्य किसी बॉलीवुड की क्राइम थ्रिलर (Crime Thriller) फिल्म से कम नहीं था। दिन के करीब 3 बज रहे थे। पिपलियामंडी की सड़कें आम दिनों की तरह शांत थीं, लेकिन पुलिस की एक जीप की गश्त ने इस शांति को एक जबरदस्त चेज़ सीक्वेंस (Chase Sequence) में बदल दिया। सामने था हाईवे का ओवरब्रिज, पीछे थी मुस्तैद पुलिस, और बीच में था पीठ पर ‘काली मौत’ लादे एक खौफजदा तस्कर!
दिनांक 05 सितंबर 2026 की दोपहर, पिपलियामंडी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक (SI) रितेश डामोर अपनी टीम—आरक्षक नागेश्वर पाटीदार, रिंकूसिंह और पवन पाटीदार—के साथ इलाके की गश्त कर रहे थे। पुलिस का वाहन खात्याखेड़ी रोड से रेलवे अंडरब्रिज पार कर मीनाक्षी होटल की तरफ बढ़ ही रहा था कि उनकी पारखी नजरों ने नगर परिषद के सम्पवेल (पंप हाउस) के पास एक 20-25 साल के युवक को देखा। उसकी पीठ पर एक काला पिठ्ठू बैग टंगा था।
पुलिस की जीप देखते ही उल्टे पांव भागा तस्कर!
खाकी वर्दी और पुलिस की गाड़ी देखते ही युवक के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। बिना एक पल गंवाए, वह अचानक पलटा और हाईवे ओवरब्रिज की तरफ तेजी से दौड़ लगा दी। शक यकीन में बदल चुका था! SI रितेश डामोर ने तुरंत अपनी टीम को अलर्ट किया। मध्य प्रदेश पुलिस (MP Police) के जवानों ने चीते की फुर्ती से दौड़कर तस्कर की जबरदस्त घेराबंदी की और उसे धर दबोचा। पकड़े जाने पर वह बुरी तरह कांप रहा था।
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सड़क किनारे बना अस्थाई पुलिस कंट्रोल रूम (Cinematic Investigation)
कानूनी कार्रवाई को पुख्ता (Ironclad) बनाने के लिए पुलिस ने जो किया, वह हैरान कर देने वाला था। मौके पर ही गवाहों को बुलाया गया। थाने से लैपटॉप, प्रिंटर, इलेक्ट्रिक बोर्ड और वजन तौलने की मशीन मंगवाई गई। नगर परिषद के सम्पवेल के बोर्ड से बिजली का तार जोड़कर सड़क पर ही एक मिनी-कंट्रोल रूम चालू कर दिया गया, ताकि एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की सारी कागजी कार्रवाई तुरंत और पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके!
काले बैग में कंबल, और कंबल के अंदर… 1 किलो अफीम!
जब पुलिस ने उस घबराए हुए तस्कर—जिसकी पहचान करण पिता कांतिलाल भील (उम्र 23 वर्ष, निवासी धामेड़ी, थाना पिपलौदा, जिला रतलाम) के रूप में हुई—के काले ‘फाइन टच’ (Fine Touch) बैग की तलाशी ली, तो सबकी आंखें फटी रह गईं।
बैग की सबसे बड़ी चेन खोलने पर अंदर एक रंग-बिरंगा कंबल समेट कर रखा गया था। कंबल की परतों के बीच एक सफेद पारदर्शी पॉलीथिन बड़ी ही चालाकी से छिपाई गई थी। उस थैली को खोला गया तो उसके अंदर एक और पॉलीथिन थी, जिसे धागे से बांधा गया था। अंदर मौजूद था मटमैला-काला गाढ़ा पदार्थ… तीक्ष्ण गंध वाली असली अफीम (Opium)।
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सटीक कार्रवाई और तस्कर सलाखों के पीछे
मौके पर बुलाई गई इलेक्ट्रॉनिक मशीन से जब अफीम का वजन किया गया, तो वह पूरा 1 किलोग्राम निकला। पुलिस ने तुरंत अफीम, बैग और तस्कर का मोबाइल फोन जब्त कर लिया और पूरी जब्ती की प्रक्रिया की ‘ई-साक्ष्य’ (E-Sakshya) ऐप के जरिए वीडियोग्राफी कराई।
आरोपी करण भील को विधिवत गिरफ्तार कर पिपलियामंडी थाने लाया गया, जहां उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि यह 1 किलो अफीम कहां से लाई गई थी और किसे डिलीवरी दी जानी थी। चौकी प्रभारी रितेश डामोर की इस फिल्मी स्टाइल घेराबंदी और स्पॉट पर ही स्मार्ट कार्रवाई ने ड्रग माफियाओं की नींदें उड़ा दी हैं!
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