मंदसौर (यशस्वी दुनिया)। मंदसौर शहर में बेखौफ सक्रिय शातिर साइबर अपराधियों ने एक बार फिर आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर सेंधमारी कर सनसनी फैला दी है। कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत अज्ञात साइबर ठगों ने सुनियोजित तरीके से अलग-अलग हाई-टेक हथकंडे अपनाकर दो सीधे-सादे लोगों को अपना शिकार बनाया और उनके बैंक खातों से कुल ₹62,700 की ऑनलाइन धोखाधड़ी कर डाली। किसी को गंभीर बीमारी के आयुर्वेदिक इलाज का झांसा देकर ठगा गया, तो किसी के बैंक खाते से बिना भनक लगे पलक झपकते ही मोटी रकम साफ कर दी गई।

दोनों मामलों में पीड़ितों की लिखित शिकायत के बाद मंदसौर कोतवाली पुलिस ने देश के नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत दो अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज कर साइबर जालसाजों की तलाश तेज कर दी है। पुलिस साइबर सेल की मदद से संबंधित बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स और संदिग्ध मोबाइल नंबरों का सुराग जुटाने में लगी है।

पहला मामला: आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर विश्वास जीता, फिर खाते से निकलवाए ₹32,700

ठगी की पहली चौंकाने वाली वारदात शहर के नानेश विहार (पद्मावती रिसोर्ट के सामने) की रहने वाली 54 वर्षीय अंबिका प्रसाद द्विवेदी के साथ घटित हुई। अज्ञात साइबर जालसाज ने उनसे संपर्क कर आयुर्वेदिक पद्धति से संपूर्ण इलाज करने का ऐसा मायाजाल बुना कि वे उसके मीठे बोल और झूठे वादों के बहकावे में आ गईं। आरोपी ने इलाज और दवाओं के नाम पर पहले पीड़िता का गहरा विश्वास हासिल किया। इसके बाद 1 जुलाई से 3 जुलाई 2026 के बीच छलपूर्वक अलग-अलग किस्तों में फरियादी के खाते से कुल ₹32,700 अपने बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए।

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जब खाते से रुपये कट जाने के बाद भी कोई दवा या डॉक्टर नहीं मिला और कथित ठग ने अपना फोन बंद कर लिया, तब जाकर अंबिका प्रसाद को गंभीर धोखाधड़ी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत कोतवाली थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 18 अगस्त की रात 9:34 बजे अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 522/2026 दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी।

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दूसरा मामला: बैंक खाते में डिजिटल सेंध, बिना खबर उड़े ₹30 हजार

वहीं दूसरा सनसनीखेज मामला शहर के हनुमान नगर, रामटेकरी निवासी 35 वर्षीय सिद्धार्थ कुमावत के साथ सामने आया। सिद्धार्थ के बैंक खाते पर अज्ञात साइबर शातिरों ने ऑनलाइन अटैक किया। शिकायत के मुताबिक 31 मई की शाम करीब 6:00 बजे अज्ञात आरोपी ने ऑनलाइन तरीके से उनके खाते में अनाधिकृत सेंधमारी करते हुए ₹30,000 की धोखाधड़ी कर ली। मोबाइल फोन पर बैंक से भारी रकम डेबिट होने का मैसेज देखते ही फरियादी के होश उड़ गए।

फरियादी ने तत्काल बैंक और पुलिस को सूचित किया। प्राथमिक छानबीन, बैंक स्टेटमेंट के सत्यापन और तकनीकी साक्ष्यों के संकलन के बाद कोतवाली पुलिस ने 18 अगस्त की रात 7:30 बजे अपराध क्रमांक 521/2026 पंजीबद्ध किया है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 318(4) के तहत दोनों केस दर्ज: साइबर सेल कर रही जांच

कोतवाली थाना पुलिस ने दोनों ही मामलों में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) (छलपूर्वक संपत्ति परिदान कराने यानी धोखाधड़ी व चीटिंग) के तहत गंभीर मुकदमे दर्ज किए हैं। पुलिस की विशेष साइबर इन्वेस्टिगेशन टीम अब उन बैंक खातों, यूपीआई आईडी (UPI ID), आईपी एड्रेस और संबंधित मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का सूक्ष्म तकनीकी विश्लेषण कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रेल के आधार पर अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों तक जल्द पहुंचा जाएगा।

साइबर ठगों के नए पैंतरे: कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच मंदसौर पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आमजन को सतर्क रहने के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है:

  • लुभावने झांसों से बचें: किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले सस्ते व चमत्कारी इलाज, घर बैठे कमाई, लॉटरी या सस्ते लोन के झांसे में कतई न आएं।
  • वित्तीय गोपनीयता बनाए रखें: अपना बैंक अकाउंट नंबर, एटीएम/डेबिट कार्ड का सीवीवी (CVV), यूपीआई पिन (UPI PIN) या ओटीपी (OTP) किसी भी सूरत में किसी के साथ साझा न करें। बैंक या कोई भी वैध संस्था कभी फोन पर ओटीपी नहीं मांगती।
  • अज्ञात लिंक्स और ऐप्स से दूरी: अज्ञात नंबरों से आने वाले किसी भी वेब लिंक, .apk फाइल या AnyDesk/TeamViewer जैसी स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स को अपने मोबाइल में भूलकर भी इंस्टॉल न करें।
  • गोल्डन ऑवर में करें रिपोर्ट: यदि आपके साथ कोई भी ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। घटना के शुरुआती 2 से 3 घंटों में शिकायत होने पर ठगी गई राशि को बैंक में फ्रीज कराने की संभावना सबसे अधिक होती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

Q1: मंदसौर कोतवाली थाने में साइबर ठगी के कौन-कौन से मामले दर्ज हुए हैं?
उत्तर: कोतवाली पुलिस ने नानेश विहार निवासी अंबिका प्रसाद द्विवेदी से आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर ₹32,700 की ठगी (FIR 522/2026) और रामटेकरी निवासी सिद्धार्थ कुमावत के बैंक खाते से ₹30,000 की अवैध ऑनलाइन निकासी (FIR 521/2026) के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

Q2: ऑनलाइन साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
उत्तर: साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें, अपने बैंक के कस्टमर केयर पर संपर्क कर खाते व डेबिट/क्रेडिट कार्ड को तुरंत ब्लॉक कराएं और साइबर पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर लिखित शिकायत दर्ज करें।

Q3: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) क्या है?
उत्तर: BNS 2023 की धारा 318(4) छल और धोखाधड़ी (Cheating and Dishonestly Inducing Delivery of Property) का दंडात्मक प्रावधान है (जो पूर्व में IPC 420 थी)। इसमें दोषी पाए जाने पर 7 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

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कैलाश विश्वकर्मा