पटना: बिहार की राजधानी पटना में स्थित प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (KGS) के संचालक और देश के सबसे लोकप्रिय शिक्षकों में से एक खान सर (पटना फायरिंग खान सर – Patna Firing Khan Sir Controversy) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में उनके कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और उसके बाद सुरक्षा गार्डों द्वारा की गई जवाबी फायरिंग के मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद कानूनी रस्साकशी तेज हो गई है। खान सर के कानूनी सलाहकार और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने स्पष्ट किया है कि खान सर पटना सिविल कोर्ट में आत्मसमर्पण (Surrender) नहीं करेंगे। वे इस मामले में बेकसूर हैं और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। बचाव पक्ष सोमवार को माननीय न्यायालय के समक्ष अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच, खान सर की संभावित गिरफ्तारी के विरोध में सैकड़ों छात्र और समर्थक रातभर कोचिंग सेंटर के बाहर डटे रहे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखा विरोध प्रदर्शन किया।
पूरा घटनाक्रम: 2 जून की रात को क्या हुआ था?
मामले की गहराई को समझने के लिए हमें घटना के मूल कारणों पर जाना होगा। यह पूरा विवाद 2 जून 2026 की रात का है, जब पटना स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ पर अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने धावा बोल दिया था। सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के अनुसार, 20 से 25 अज्ञात बदमाशों की भीड़ ने कोचिंग परिसर पर पथराव किया और वहां सुरक्षा में तैनात गार्डों पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक हमले में कोचिंग के सुरक्षा गार्ड को बुरी तरह पीटा गया, जिससे वह लहूलुहान हो गया। अपनी और संस्थान की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए, खान सर के निजी सुरक्षा गार्डों ने हवाई फायरिंग (Self Defence Firing) की। इस फायरिंग के बाद हमलावर मौके से भाग खड़े हुए। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पटना पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों सुरक्षा गार्डों, प्रदीप और तारकेश्वर को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से हथियार जब्त कर लिए। देश में इस तरह के हिंसक हमलों और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई जा रही है, ठीक उसी तरह जैसे पूर्व में विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के दौरान विभिन्न संगठनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के समय प्रशासनिक मुस्तैदी देखी गई थी।
पुलिस की एफआईआर और गंभीर धाराएं: खान सर पर क्यों लटकी तलवार?
घटना के बाद गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्डों के पुलिसिया बयान के आधार पर मामला पूरी तरह से खान सर की ओर घूम गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार गार्डों ने अपने इकबालिया बयान में कहा कि हमला होने पर खान सर ने उनसे कहा था, “तुम गोली चलाओ, बाकी सब मैं देख लूंगा।” इसी बयान को आधार बनाते हुए पटना पुलिस ने खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस धारा के तहत दर्ज मामलों में सामान्यतः अग्रिम जमानत मिलना काफी कठिन होता है और पुलिस को बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मुख्य हमलावरों की गिरफ्तारी के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही शिकंजा कसा जा रहा है। ऐसे गंभीर मामलों में पुलिसिया जांच के तरीकों को लेकर पूर्व में भी विवाद होते रहे हैं, जैसे कि देश की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए विशिष्ट ऑपरेशन्स के दौरान की गई सर्जिकल स्ट्राइक और त्वरित पुलिस कार्रवाई हमेशा से चर्चा का विषय रही हैं।
कानूनी रणनीति: सरेंडर से इनकार और सोमवार को अग्रिम जमानत की तैयारी
खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने मीडिया से बातचीत करते हुए पुलिस की एफआईआर को पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और झूठा बताया। उन्होंने कहा, “हमारे क्लाइंट खान सर ने ऐसा कोई आदेश या बयान नहीं दिया था कि तुम गोली चलाओ। जब 25 लोग किसी पर लाठियों से हमला करेंगे, तो सुरक्षा गार्ड का काम आत्मरक्षा करना होता है। गार्ड्स ने कानून के दायरे में रहकर आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की थी, ताकि जान-माल का नुकसान न हो।” अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि शनिवार को न्यायालय का समय समाप्त हो जाने के कारण वे अग्रिम जमानत याचिका दाखिल नहीं कर पाए, लेकिन सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में खान सर की अग्रिम जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही, गिरफ्तार सुरक्षा गार्डों प्रदीप और तारकेश्वर की नियमित जमानत के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत में याचिका दायर की गई है, जिस पर सोमवार को ही सुनवाई होनी तय है। इस कानूनी लड़ाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
इस पूरे मामले की पल-पल की अपडेट और आधिकारिक पुलिस बयानों के लिए पाठक बिहार पुलिस (Bihar Police) के आधिकारिक पोर्टल पर जारी विज्ञप्तियों को देख सकते हैं।
छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन: रातभर पुलिस और छात्रों में तनातनी
जैसे ही खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होने और उनकी संभावित गिरफ्तारी की खबर फैली, पूरे पटना में हड़कंप मच गया। हजारों की संख्या में छात्र और खान सर के समर्थक रात में ही उनके कोचिंग संस्थान के बाहर एकत्र हो गए। पटना पुलिस की पांच गाड़ियां रातभर अलग-अलग समय पर कोचिंग परिसर के पास गश्त लगाती रहीं और खान सर को हिरासत में लेने का प्रयास करती रहीं। हालांकि, छात्रों के भारी विरोध और मानवीय घेरे के कारण पुलिस बल परिसर के भीतर प्रवेश नहीं कर सका। पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए बार-बार घोषणा करती रही, “सभी छात्र यहां से हट जाएं और अपने घरों को लौट जाएं,” लेकिन छात्र “खान सर को न्याय दो” और “पुलिस प्रशासन होश में आओ” के नारे लगाते हुए रातभर सड़क पर डटे रहे। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि खान सर कोचिंग बिल्डिंग के अंदर ही मौजूद हैं और कानून के अनुसार अपने वकीलों के संपर्क में हैं। पुलिस ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के बहकावे में न आएं और कानून-व्यवस्था को हाथ में न लें।
चित्र: खान सर (संस्थापक, खान ग्लोबल स्टडीज) का जीवन परिचय एवं शैक्षणिक विवरण
क्लासरूम वीडियो वायरल: खान सर ने बच्चों से क्या कहा?
इस पूरे विवाद के बीच खान सर का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो संभवतः घटना के अगले दिन का है। इस वीडियो में खान सर क्लासरूम में बैठे सैकड़ों बच्चों को सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए घटना की सच्चाई बता रहे हैं। वे वीडियो में कह रहे हैं, “विद्या की कसम खाकर कहता हूं, उस रात हमारे सुरक्षा गार्ड को 20 से 25 लोगों ने सड़क पर बेरहमी से पीटा था। पुलिस की गाड़ियां मौके पर उड़कर तो नहीं पहुंच सकती थीं, उन्हें आने में समय लगना स्वाभाविक था। ऐसे में सुरक्षा गार्ड ने अपनी जान बचाने और आप सभी बच्चों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की। लेकिन पुलिस अब असली हमलावरों को पकड़ने के बजाय हम पर ही केस दर्ज कर रही है और मुख्य मुद्दे से ध्यान भटका रही है।”
वीडियो में खान सर ने एक अत्यंत गंभीर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अगर हमारा यह संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ बंद हो गया, तो आप मानकर चलिए कि अगले छह महीनों के भीतर पटना और देश के अन्य बड़े शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग फीस एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। हमारा उद्देश्य व्यवसाय करना नहीं, बल्कि गरीब से गरीब बच्चे को न्यूनतम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। यदि हमें रोका गया, तो इसका सीधा नुकसान देश के लाखों गरीब छात्रों को होगा।” शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के संघर्ष और बच्चों के उज्जवल भविष्य की कहानियां देश के कोने-कोने से आती रही हैं, जैसे कि हाल ही में एक पूर्व सैनिक की बेटी का वायु सेना में चयन जैसी गौरवमयी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि जब गरीब बच्चों को सही और सस्ती शिक्षा मिलती है, तो वे देश का नाम रोशन करते हैं।
शिक्षा जगत में आक्रोश और गरीब छात्रों का भविष्य दांव पर
खान सर केवल एक शिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के करोड़ों छात्रों के प्रेरणास्रोत हैं। उनके पढ़ाने का अनूठा और ठेठ देसी अंदाज बच्चों को बहुत पसंद आता है। वर्तमान में उनके संस्थान में यूपीएससी (UPSC), बीपीएससी (BPSC), एसएससी (SSC) और रेलवे जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्र नामांकित हैं, जिनमें से अधिकांश अत्यंत गरीब परिवारों से आते हैं। शिक्षाविदों और नागरिक समाज का मानना है कि इस मामले में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक द्वेष के कारण एक शिक्षक को प्रताड़ित किया जाता है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अत्यंत निराशाजनक संदेश होगा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के विभिन्न मंचों पर भी समय-समय पर देश में सुरक्षित और वहनीय शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की वकालत की जाती रही है, ताकि हर छात्र बिना किसी भय के अपनी शिक्षा पूरी कर सके।
चलते-चलते: न्याय और पारदर्शिता की दरकार
पटना में खान सर के कोचिंग संस्थान पर हमला और उसके बाद पुलिस द्वारा उन पर ही हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करना प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आत्मरक्षा का अधिकार देश के हर नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त है। यदि सुरक्षा गार्डों ने हिंसक भीड़ से बचने के लिए हवाई फायरिंग की, तो उसे अपराध की श्रेणी में रखना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वे भीड़ में शामिल असली दंगाइयों और हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, न कि कानून का पालन करने वाले और देश के भविष्य को संवारने वाले शिक्षकों को कटघरे में खड़ा करें। आशा है कि माननीय न्यायालय इस संवेदनशील मामले में सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर एक न्यायपूर्ण निर्णय लेगा, जिससे देश के लाखों छात्रों का अपनी शिक्षा और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
कैलाश विश्वकर्मा
मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)
कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, अपराध और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।
– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया
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