कोटा: पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के अंतर्गत आने वाले कोटा मंडल के प्रमुख स्टेशन कोटा जंक्शन (Kota Junction) पर रेलवे की त्वरित चिकित्सा व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता का एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। वलसाड से सुबेदारगंज जा रही एक स्पेशल ट्रेन में यात्रा कर रही महिला यात्री को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके बाद कोटा जंक्शन पर रेलवे के चिकित्सा दल ने मूसलाधार बारिश के बीच तत्परता दिखाते हुए जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षित रक्षा की। चलती ट्रेन में प्रसव की इस आकस्मिक घटना में रेलवे प्रशासन ने जिस तेजी और संवेदनशीलता से कार्य किया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
चित्र: चलती ट्रेन में सफल प्रसव के बाद सुरक्षित माँ श्रीमती सोनी देवी और नवजात शिशु
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Senior DCM, Kota Division) श्री सौरभ जैन ने घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि वलसाड–सुबेदारगंज स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 04120) में यह प्रसव पीड़ा की घटना 8 जून 2026 की रात को घटित हुई। ट्रेन के स्लीपर कोच में यात्रा कर रही 24 वर्षीय श्रीमती सोनी देवी (निवासी फतेहपुर सीकरी) को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। कोटा मंडल हमेशा से रेल यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा के लिए प्रतिबद्ध रहा है; जैसे कि पूर्व में भी कोटा मंडल आरपीएफ ने ऑपरेशन अमानत और अन्य संवेदनशील प्रयासों से यात्रियों की रक्षा की है।
वाणिज्य नियंत्रण कक्ष को रात 2:50 बजे मिली सूचना
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि रात के 2:50 बजे रेलवे वाणिज्य नियंत्रण कक्ष कोटा को सूचना प्राप्त हुई कि गाड़ी संख्या 04120 में एक गर्भवती महिला यात्री को अत्यधिक प्रसव पीड़ा हो रही है और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।
सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन ने तत्काल एक्शन लिया। कोटा जंक्शन पर रेलवे के चिकित्सा दल को अलर्ट किया गया और जरूरी चिकित्सकीय उपकरण व दवाइयां लेकर प्लेटफॉर्म पर तैयार रहने का निर्देश दिया गया। रेलवे हमेशा समयबद्धता और यात्रियों की सेवा में अग्रसर रहता है, जिसका प्रमाण हाल ही में कोटा से उज्जैन तक शुरू की गई सीधी मेमू सेवा जैसी सुविधाओं में भी देखने को मिलता है।
मूसलाधार बारिश में देवदूत बना रेलवे चिकित्सा दल
रात्रि 3:15 बजे जैसे ही वलसाड–सुबेदारगंज स्पेशल ट्रेन कोटा जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वैसे ही कोटा में हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद रेलवे का चिकित्सकीय दल तुरंत कोच तक पहुंचा। इस दल में महिला चिकित्सक डॉ. सना जमील (CMP) एवं स्टाफ ड्रेसर अकीला बानो शामिल थीं।
चित्र: भारी बारिश के बीच कोटा जंक्शन की ओर बढ़ती वलसाड-सुबेदारगंज स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन (सांकेतिक चित्र)
चिकित्सक दल के कोच में पहुंचने तक ट्रेन में ही शिशु का जन्म हो चुका था। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए डॉ. सना जमील और अकीला बानो ने तत्परता से काम शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले नवजात शिशु की नाभिनाल (Umbilical Cord) की एंटीसेप्टिक सफाई की और स्टेराइल क्लैम्पिंग (Sterile Clamping) की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद प्रसूता माँ की प्रसवोत्तर (Postpartum) चिकित्सकीय जांच की गई ताकि उन्हें किसी प्रकार का संक्रमण या रक्तस्राव न हो। जांच में नवजात बालक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
चित्र: कोटा जंक्शन पर त्वरित चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाली रेलवे चिकित्सा टीम की सदस्य (सांकेतिक चित्र)
परिजनों ने अस्पताल जाने के बजाय यात्रा जारी रखने का लिया निर्णय
रेलवे के चिकित्सा दल ने माँ और नवजात को बेहतर देखभाल और सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। हालांकि, महिला के परिजनों ने अपनी यात्रा जारी रखने का निर्णय लिया। परिजनों की इच्छा का सम्मान करते हुए रेलवे डॉक्टरों ने उन्हें आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध कराईं तथा नवजात एवं प्रसूता की देखभाल से संबंधित आवश्यक परामर्श (Medical Counseling) भी दिया।
यह उल्लेखनीय है कि कोटा रेल मंडल अपने चिकित्सा और जन कल्याणकारी कार्यों के लिए निरंतर जाना जाता है। कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले अन्य स्टेशनों पर भी ऐसी सुविधाएं निरंतर बढ़ाई जा रही हैं, जैसे कि हाल ही में गंगापुर सिटी रेलवे अस्पताल में सौर ऊर्जा संयंत्र शुरू किया गया है जो पर्यावरण के साथ-साथ चिकित्सा बुनियादी ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन का जताया आभार
ट्रेन के प्रस्थान के समय श्रीमती सोनी देवी और उनका नवजात पुत्र दोनों पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित थे। रेलवे चिकित्सा दल की इस त्वरित कार्यवाही, पेशेवर दक्षता और मानवीय संवेदना की ट्रेन में मौजूद सभी यात्रियों और परिजनों ने सराहना की। परिजनों ने कोटा रेल प्रशासन और चिकित्सा दल का सहदय धन्यवाद व्यक्त किया। रेलवे द्वारा आपातकालीन स्थितियों में दिखाई जाने वाली यह तत्परता भारतीय रेलवे की छवि को और अधिक विश्वसनीय और सेवाभावी बनाती है।
कैलाश विश्वकर्मा
मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)
कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, रेलवे और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।
– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया
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