मंदसौर (Mandsaur): मंदसौर जिले में मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का एक बेहद सनसनीखेज और अनोखा मामला उजागर हुआ है। **डाक पार्सल अफीम तस्करी मंदसौर** (Mandsaur Postal Opium Smuggling Attempt) के इस बड़े मामले में, तस्करों द्वारा डाक विभाग के नेटवर्क का उपयोग कर अफीम को विदेशों में भेजने की नाकाम कोशिश की गई। शहर के हृदय स्थल में स्थित बीएसएनएल (BSNL) परिसर के प्रधान डाकघर में विदेश (कनाडा) भेजने के लिए बुक कराए जा रहे एक पार्सल को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और सतर्क डाक कर्मचारियों ने समय रहते जब्त कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई में करीब 2 किलोग्राम उच्च श्रेणी की अफीम जब्त की गई है, जबकि पार्सल बुक कराने आया संदेहास्पद युवक चकमा देकर मौके से फरार होने में सफल रहा।

📢 यशस्वी दुनिया विशेष संपादकीय टिप्पणी:

“स्पीड पोस्ट के दुरुपयोग का इससे बेहतरीन उदाहरण क्या मिलेगा… इस घटना से यह सीख मिलती है की पोस्ट ऑफिस में अब स्कैनर लगाया जाए ताकि भेजने वाली हर चीज का पता लग जा सके कि प्रेषक क्या भेज रहा है यह गोरख धंधा कितने दिनों…?? से कितनी बार…?? कितने लोगों..?? द्वारा किया गया होगा यह सोचकर ही आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे..? विदेश भेजने वाली सभी डाक प्रेषकों का रिकॉर्ड पुलिस खंगाले तो कई धमाके हो खुलासे इस मामले पर हो सकते हैं आवश्यकता है गहन छानबीन की।”

डाक पार्सल अफीम तस्करी मंदसौर चॉकलेट

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[फोटो: चॉकलेट (Luv Chocolate) की आड़ में पार्सल के अंदर छिपाकर कनाडा भेजी जा रही थी करीब 2 किलो अफीम की बड़ी खेप]

चॉकलेट (Chocolates) के रैपरों में छुपाकर की जा रही थी मादक पदार्थ की तस्करी

जांच के दौरान सीबीएन (CBN) और पुलिस अधिकारियों ने जब जब्त किए गए पार्सल को खोला, तो वे दंग रह गए। पार्सल के भीतर रखी खाद्य सामग्रियों में बड़ी संख्या में ‘लव चॉकलेट’ (Luv Chocolates) के पैकेट थे। तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की आँखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद शातिर तकनीक अपनाई थी। उन्होंने चॉकलेट के चमकीले हरे और सुनहरे रैपरों को खोलकर, उनके भीतर से चॉकलेट निकालकर गोल आकार में काली अफीम भर दी थी और उन्हें वापस इस तरह पैक कर दिया था कि सामान्य नजर में वे बिल्कुल असली चॉकलेट दिखाई दे रही थीं।

मंदसौर डाकघर सीबीएन पुलिस रेड

[फोटो: मंदसौर के प्रधान डाकघर के अंदर जांच पड़ताल और अफीम की पंचनामा कार्रवाई को अंजाम देते सीबीएन व स्थानीय पुलिस अधिकारी]

डाकघर कर्मियों की सजगता से फरार हुआ संदेहास्पद आरोपी

बुकिंग काउंटर पर बैठे सतर्क डाक कर्मियों को जब पार्सल की असामान्य बनावट और बुकिंग कराने आए युवक की संदेहास्पद हरकतों पर शक हुआ, तो उन्होंने पूछताछ शुरू की। डाक कर्मियों की सजगता और कड़े सवालों को देखकर आरोपी युवक घबरा गया। जब डाक कर्मियों ने पुलिस व नारकोटिक्स को सूचना भेजने की तैयारी की, तो आरोपी युवक पार्सल और कपड़े वहीं छोड़कर डाकघर से रफूचक्कर हो गया।

अफीम तस्कर सीसीटीवी फुटेज मंदसौर

[फोटो: सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ पार्सल बुक कराने आए फरार संदेहास्पद तस्कर युवक का चेहरा (हरे घेरे में)]

पुलिस ने जारी किया सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, आरोपी की तलाश तेज

घटना के तुरंत बाद डाकघर के मुख्य द्वारों और काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। सीसीटीवी फुटेज में पार्सल बुक कराने आए संदेहास्पद तस्कर युवक का चेहरा बिल्कुल साफ नजर आ रहा है (फुटेज में हरे घेरे के भीतर देखें)। पुलिस और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने इस सीसीटीवी फुटेज को जारी करते हुए हुलिए के आधार पर आरोपी की तलाश में विशेष टीमें रवाना कर दी हैं। पार्सल पर लिखे पते (Address) के आधार पर तस्करों के इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की जांच कनाडा और अन्य देशों तक की जा रही है।

🎯 विश्लेषण: स्पीड पोस्ट के दुरुपयोग और सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल:

“सरकारी डाक विभाग की स्पीड पोस्ट (Speed Post) सेवा का मादक पदार्थों की तस्करी के लिए दुरुपयोग का इससे बड़ा और बेहतरीन उदाहरण और क्या मिल सकता है? यह घटना सीधे तौर पर हमारे डाकघरों के सुरक्षा ढांचे पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।”

1. हर डाकघर में स्कैनर (Scanner) होना बेहद आवश्यक:

इस घटना से प्रशासन को यह बड़ी सीख मिलती है कि अब समय आ गया है कि देश के प्रत्येक मुख्य डाकघर, विशेष रूप से ‘प्रधान डाकघरों’ में अत्याधुनिक एक्स-रे सामान स्कैनर (Baggage Scanner) लगाए जाएं। जब तक हर भेजने वाली वस्तु को तकनीकी रूप से स्कैन नहीं किया जाएगा, तब तक प्रेषक (sender) क्या भेज रहा है, इसका सटीक पता लगाना डाक कर्मियों के लिए नामुमकिन रहेगा।

2. यह गोरखधंधा कितने दिनों से और कितनी बार हुआ होगा?

यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और आश्चर्य होता है कि आखिर यह अवैध गोरखधंधा कितने दिनों से चल रहा होगा? तस्करों द्वारा कितनी बार और कितने लोगों के माध्यम से इसी प्रकार डाक के जरिए विदेशों में ड्रग्स की सफल डिलीवरी कराई जा चुकी होगी? क्योंकि बिना स्कैनर के सामान्य कपड़े या डिब्बे में छिपाई गई ड्रग्स को पहचान पाना हर बार संभव नहीं होता।

3. विदेश जाने वाली डाक के प्रेषकों की जांच से होंगे बड़े खुलासे:

आवश्यकता इस बात की है कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस और सीबीएन की टीम पिछले एक से दो वर्षों के दौरान इस डाकघर से विदेशों (विशेष रूप से कनाडा, यूरोप और खाड़ी देशों) में भेजी गई सभी स्पीड पोस्ट और पार्सलों के प्रेषकों (Senders) का पूरा रिकॉर्ड खंगाले। यदि इन संदिग्ध पतों और प्रेषकों का गहन पुलिस सत्यापन (Verification) किया जाए, तो मादक पदार्थ तस्करी के इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और बड़े सरगना बेनकाब हो सकते हैं।

📦 डाक पार्सल बुकिंग पर सीबीएन की विशेष चेतावनी:

“नारकोटिक्स विभाग द्वारा सभी कूरियर और सरकारी डाक कर्मचारियों को विदेशों में जाने वाले पार्सलों की गहन जांच करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं। किसी भी बुकिंग के समय सेंडर का आधिकारिक पहचान पत्र (आधार/पैन कार्ड) और मोबाइल नंबर का लाइव सत्यापन अनिवार्य है। संदिग्ध गतिविधियां दिखने पर तुरंत सीबीएन को सूचित करें।”

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कैलाश विश्वकर्मा