आगर मालवा: रात का गहराता अंधेरा और खामोश सड़कें। एक ऐसा मुजरिम जो पिछले चार सालों से कानून की आँखों में धूल झोंक रहा था। नाम- श्याम सिंह उर्फ ‘शेरा’। अपराध- मौत का व्यापार (NDPS एक्ट)। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि खाकी की पैनी निगाहें साये की तरह उसका पीछा कर रही हैं। यह कहानी किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है, जहां पुलिस के बिछाए गए एक अचूक चक्रव्यूह में 10 हजार का इनामी ड्रग माफिया आखिरकार ढेर हो गया।
एक खौफनाक अतीत और फरारी के चार साल
साल 2020, बड़ौद थाने में एक संगीन मामला दर्ज होता है- अपराध क्रमांक 363/2020 (धारा 8/27 NDPS एक्ट)। पुलिस के रडार पर आता है बनोटी खुर्द का 40 वर्षीय शातिर अपराधी श्याम सिंह उर्फ शेरा। लेकिन शेरा भी कोई आम मुजरिम नहीं था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने एक गिरगिट की तरह रंग बदले। हर दिन एक नया ठिकाना, हर रात एक नया शहर। पुलिस को चकमा देने के लिए वह अपने ठिकाने इतनी तेजी से बदलता था कि कई बार पुलिस की टीमें उसके पहुँचने से बस चंद मिनटों की दूरी से चूक जाती थीं।
ऑपरेशन ‘शेरा’ का आगाज: एसपी का मास्टरस्ट्रोक
कानून के लंबे हाथ कब तक खाली रहते? आगर मालवा के तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक (SP) श्री दिलीप कुमार सोनी ने जब कमान संभाली, तो उन्होंने सख्त निर्देश दिए- “कोई भी वारंटी, चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, सलाखों के पीछे होना चाहिए।” इसी के साथ शेरा पर नकेल कसने की रणनीति बनी और उसकी गिरफ्तारी पर ₹10,000 का नकद इनाम घोषित कर दिया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रविन्द्र कुमार बोयट और एसडीओपी आगर श्री मोतीलाल कुशवाहा के मार्गदर्शन में बड़ौद थाना प्रभारी, निरीक्षक रूप सिंह बैस ने अपनी सबसे भरोसेमंद टीम तैयार की। इस टीम में शामिल हुए सउनि हरीनारायण सोलंकी, प्रधान आरक्षक अर्जुन बागड़ी, श्रीपाल सिंह, शुभम जोशी और राहुल विश्वकर्मा। अब शुरू हुआ मुखबिरों का वह जाल, जिसे भेद पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था।
अस्पताल का सन्नाटा और पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
दिन बीत रहे थे और अचानक एक रात बड़ौद पुलिस के सबसे गुप्त मुखबिर से एक सटीक टिप मिली। सूचना थी कि फरारी काट रहा ‘शेरा’ भेस बदलकर बड़ौद के सरकारी अस्पताल इलाके में मंडरा रहा है। यह वह मौका था जिसे पुलिस किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती थी।
बिना सायरन बजाए, पुलिस की गाड़ियां खामोशी से अस्पताल की ओर दौड़ीं। थाना प्रभारी रूप सिंह बैस की टीम ने अस्पताल के चारों तरफ एक ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह रच दिया कि परिंदा भी पर न मार सके। सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों ने इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया। शेरा, जो अभी भी यह सोच रहा था कि वह पुलिस से एक कदम आगे है, अचानक अपने आप को चारों तरफ से घिरता हुआ पाता है। भागने का हर रास्ता बंद हो चुका था। कुछ ही सेकंडों में पुलिस ने एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी फुर्ती दिखाते हुए शेरा को दबोच लिया।
खाकी की जीत और अपराध का अंत
चार साल की लंबी लुका-छिपी का यह सनसनीखेज अंत था। 10 हजार के इनामी शेरा के हाथों में अब हथकड़ियां थीं और चेहरे पर पुलिस का खौफ। उसे तुरंत माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसका सफर जेल की काल कोठरी तक तय हो गया।
बड़ौद पुलिस की इस खौफनाक और रोमांचक कार्रवाई ने पूरे आगर मालवा जिले के अपराधियों में एक साफ संदेश दे दिया है- “कानून से तुम भाग सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते। अगर तुमने अपराध किया है, तो पुलिस का यह चक्रव्यूह तुम्हें ढूँढ ही निकालेगा।”