मंदसौर। (लेखक: अभिषेक विद्यार्थी) 1 अप्रैल 2026 से पहले जिले समेत देशभर में E-10 पेट्रोल मिल रहा था, जो अब E-20 (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) हो चुका है। जिले में 175 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जहां इसकी बिक्री हो रही है। लेकिन इन 79 दिनों में इसके साइड इफेक्ट्स भी दिखने लगे हैं।
वाहनों के माइलेज व पिकअप में कमी, इंजन पैकिंग में इस्तेमाल रबर-प्लास्टिक पैकिंग फूलने, पेट्रोल टैंक में जंग, कार्बोरेटर में पानी जैसा लिक्विड जमने जैसी गंभीर शिकायतें लगातार आ रही हैं।
पुराने वाहनों के लिए अनुकूल नहीं
मैकेनिकों का कहना है कि यह पेट्रोल 2023 के बाद बने 2-व्हीलर और 4-व्हीलर के लिए ही अधिक उपयुक्त है, उससे पहले बने वाहनों के लिए नहीं। इधर हैरानी की बात यह है कि नई एथेनॉल पॉलिसी के बाद से आपूर्ति विभाग ने पेट्रोल पंपों पर 1 भी ईंधन सैंपल नहीं लिया। ऐसे में पंपों पर कहां कितना प्रतिशत मिला रहे हैं, बिना जांच के पता नहीं चल पाएगा, और यह सवाल बरकरार है।
जिला परिवहन कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 3 साल से ज्यादा पुराने रजिस्टर्ड पेट्रोल वाहनों की संख्या 2 लाख 25 हजार से ज्यादा है, ये सभी चलन में हैं। इनके इंजन की बनावट E-05 और E-10 के अनुकूल हैं।
ये खामियां… 35 दिन से बाइक खड़ी थी, टैंक से पानी जैसा लिक्विड निकला
अभिनंदन नगर निवासी ऋतिक पालड़िया ने बताया कि घर में 3 वाहन हैं। 35 दिन से बाइक घर में खड़ी थी, स्टार्टिंग में परेशानी आई। बाद में पता चला कि टंकी में से पानी निकला है। कंबल केंद्र रोड निवासी सौरभ जैन का कहना है कि सरकार को ई-10 जैसे विकल्प भी देना चाहिए, क्योंकि एक बड़ी तादाद इन वाहनों की अब भी सड़क पर है। परमानंद ठाकुर का कहना है कि इंजन में घर्षण की आवाजें आने लगी हैं।
एक्सपर्ट व्यू – नासिर खान, 20 सालों का मैकेनिक अनुभव
एथेनॉल हवा से नमी खींचता है, माइलेज-पिकअप पर असर दिखा: एथेनॉल हवा से नमी खींचता है, इसलिए ज्यादा दिन वाहन खड़ा रहने से टैंक में पानी जैसा लिक्विड जमा हो जाता है। 100 सीसी से लेकर 350 सीसी तक की कैटेगरी में माइलेज और पिकअप में कमी आना आम बात हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि 3 साल पुरानी बाइक ई-10 के अनुकूल थीं। इंजन मटेरियल में लगे रबर-प्लास्टिक पार्ट्स फूलने जैसे कुछ मामले भी आने लगे हैं। खास सावधानियों व वैकल्पिक इंतजाम से वाहनों को कुछ हद तक जरूर मेंटेन रखा जा सकता है।
E-20 का सैंपल लेना बाकी
जिले में पेट्रोल पंपों की संख्या 175 तक है। आपूर्ति विभाग ने 2026 में अब तक कुल 4 सैंपल लिए हैं (वे सभी E-10 थे), और वे सभी पास निकले। जहां तक E-20 की बात है, प्रभारी जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी, नारायणसिंह चंद्रावत का कहना है कि “अगर कहीं गंभीर शिकायत आती है तो हम जांच करेंगे। जल्द ही जिलेभर में सैंपलिंग करेंगे।”
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