मंदसौर (Mandsaur): मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से अंधविश्वास और अज्ञानता की एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ **मंदसौर सर्पदंश अंधविश्वास** (Mandsaur Snakebite Superstition) की बलि चढ़कर एक 12 वर्षीय निर्दोष बच्ची की असमय दर्दनाक मौत हो गई। गांव के लखमा खेड़ी में रहने वाली पांचवीं कक्षा की छात्रा माया को सांप ने काट लिया था, लेकिन उसके परिजन उसे तुरंत जीवन रक्षक इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय अंधविश्वास के दलदल में फंसे रहे और मंदिर में ले जाकर करीब दो घंटे तक झाड़-फूंक (तंत्र-मंत्र) कराते रहे, जिससे जहर पूरी तरह फैल गया और अस्पताल पहुँचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया।

मृतका मासूम माया मंदसौर

[फोटो: मृतका 12 वर्षीय मासूम माया, जो अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चलते समय पर इलाज न मिलने से असमय काल के गाल में समा गई]

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घर में पैर के अंगूठे पर सांप ने काटा था

घटना रविवार रात की है। लखमा खेड़ी गांव निवासी 12 वर्षीय माया रात के समय अपने घर में सो रही थी। इसी दौरान एक अत्यंत विषैले सांप ने उसके पैर के अंगूठे पर डस लिया। बच्ची के चीखने पर परिजनों को सर्पदंश का पता चला। सांप के काटने की जानकारी मिलते ही जहां आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के तहत पीड़ित को तुरंत जिला चिकित्सालय ले जाना चाहिए था, वहीं परिजनों के अंधविश्वास ने एक मासूम की जान जोखिम में डाल दी।

ग्रामीण देवस्थान मंदिर झाड़ फूंक

[काल्पनिक चित्रण: ग्रामीण अंचलों में सर्पदंश के बाद अक्सर अज्ञानतावश लोग मंदिरों व देवस्थानों पर झाड़-फूंक करवाकर कीमती समय गँवा देते हैं]

लखमा खेड़ी स्थानीय बावजी देवधाम पर कराते रहे झाड़-फूंक

परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल एम्बुलेंस या वाहन बुलाकर उसे अस्पताल भेजने के स्थान पर गांव में ही स्थित **’स्थानीय देवस्थान’ (देवस्थान)** ले जाने का निर्णय लिया। वहां रात में ही करीब 2 घंटे से अधिक समय तक तांत्रिकों और पुजारियों के झाड़-फूंक और विष उतारने के अनुष्ठानों में अमूल्य समय नष्ट कर दिया गया। जब रात लगभग 10:30 बजे बच्ची के शरीर में जहर पूरी तरह फैलने लगा और वह अचेत हो गई, तब परिजनों की नींद खुली और वे उसे मंदसौर जिला अस्पताल लेकर रवाना हुए।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित, डॉक्टरों की चेतावनी

अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने तत्काल सीपीआर (CPR) और लाइफ सपोर्ट सिस्टम के माध्यम से बच्ची को पुनर्जीवित करने का आपातकालीन प्रयास किया, किंतु बहुत देर हो चुकी थी। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद मासूम माया को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती एक घंटा (Golden Hour) सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर बच्ची को झाड़-फूंक के स्थान पर तुरंत अस्पताल लाकर एंटी-वेनम (Anti-venom) दे दिया जाता, तो उसकी जान शत-प्रतिशत बचाई जा सकती थी।

एंटी वेनम इलाज आधुनिक चिकित्सा

[काल्पनिक चित्रण: डॉक्टरों की सख्त चेतावनी- सर्पदंश के मामलों में केवल एंटी-वेनम इंजेक्शन ही एकमात्र वैज्ञानिक और जीवन रक्षक उपचार है]

🚨 सर्पदंश होने पर क्या करें और क्या न करें?

  • तुरंत अस्पताल भागें: बिना एक सेकंड गंवाए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला चिकित्सालय जाएं, जहां एंटी-वेनम (ASV) उपलब्ध हो।
  • झाड़-फूंक बिल्कुल न करें: तंत्र-मंत्र, जड़ी-बूटी या देसी दवाओं के चक्कर में समय बर्बाद करना मौत को बुलावा देना है।
  • मरीज को शांत रखें: घबराने से दिल की धड़कन तेज होती है, जिससे जहर शरीर में तेजी से फैलता है। अंग को स्थिर रखें।
  • काट या चीरा न लगाएं: डंक वाले स्थान पर कट लगाना या मुंह से जहर चूसना अत्यंत खतरनाक और जानलेवा हो सकता है।

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कैलाश विश्वकर्मा