भोपाल (Bhopal): मध्यप्रदेश में अब यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code – UCC) को लागू करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने अपने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने UCC के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, सभी वर्गों से सुझाव लेने के लिए संभाग और जिला स्तर पर विशेष दल भेजे जाएंगे। सरकार का यह कदम केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर एक बहुत बड़ा संदेश माना जा रहा है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) का अर्थ है कि देश या राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति बंटवारे जैसे निजी मामलों में एक समान कानून लागू हो। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। उदाहरण के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ, ईसाई विवाह कानून आदि।
UCC लागू होने के बाद धर्म के आधार पर अलग-अलग निजी कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू किया जाएगा। भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में भी राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है।
मध्यप्रदेश सरकार ने क्या कदम उठाया है?
मध्यप्रदेश सरकार ने UCC का विस्तृत प्रारूप तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। इस समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है। यह समिति राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सामाजिक प्रथाओं से जुड़े मौजूदा कानूनों का गहन अध्ययन करेगी।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन करके मध्यप्रदेश में भी ऐसा ही सशक्त कानून लागू कर सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार दिवाली 2026 तक मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
मोहन यादव के सोशल मीडिया पोस्ट का क्या अर्थ है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सोशल मीडिया पर “सभी वर्गों से सुझाव लेने” की बात कहना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसके कई स्पष्ट संदेश हैं:
- पहला: सरकार यह दिखाना चाहती है कि UCC किसी एक धर्म या समुदाय पर थोपा गया कानून नहीं होगा, बल्कि सभी पक्षों की राय लेकर लोकतांत्रिक तरीके से तैयार किया जाएगा।
- दूसरा: बीजेपी लंबे समय से “एक राष्ट्र, एक कानून” की विचारधारा को अपने प्रमुख एजेंडे में रखती आई है। ऐसे में मोहन यादव का यह संदेश भाजपा की वैचारिक प्रतिबद्धता को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
- तीसरा: सरकार महिला अधिकार, समानता और कानूनी एकरूपता को प्रमुख मुद्दा बनाकर यह बताना चाहती है कि अलग-अलग कानूनों के कारण महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म किया जाएगा।
UCC का विरोध क्यों हो रहा है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड का सबसे अधिक विरोध मुस्लिम संगठनों और कुछ विपक्षी दलों द्वारा किया जा रहा है। इस भारी विरोध के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:
1. धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा
विरोध करने वालों का तर्क है कि भारत विविधताओं वाला देश है और हर समुदाय की अपनी अलग धार्मिक परंपराएं और निजी कानून हैं। UCC लागू होने से उनकी धार्मिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराओं पर असर पड़ सकता है।
2. अल्पसंख्यकों में आशंका
कई मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि UCC बहुसंख्यक कानूनों को अल्पसंख्यकों पर लागू करने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है। इसलिए वे इसे अपने धार्मिक मामलों में सीधा सरकारी हस्तक्षेप मानते हैं।
3. आदिवासी समुदायों की चिंता
मध्यप्रदेश एक आदिवासी बहुल (Tribal Dominant) राज्य है। कई आदिवासी संगठनों का कहना है कि उनकी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाज बिल्कुल अलग हैं। ऐसे में UCC लागू होने से उनकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सरकार आदिवासी समुदायों को इस कानून से विशेष छूट दे सकती है।
4. विपक्ष की राजनीतिक आपत्ति
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को पहले बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। विपक्ष का सीधा आरोप है कि UCC को चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण (Polarization) के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार क्या साबित करना चाहती है?
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो UCC भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लंबे समय से चले आ रहे प्रमुख एजेंडों में शामिल रहा है। राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और अब UCC को भाजपा अपनी सबसे बड़ी वैचारिक उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत करती रही है। मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की इस ऐतिहासिक पहल से सरकार कई कड़े संदेश देना चाहती है:
- “एक देश, एक कानून” की अवधारणा को धरातल पर उतारना।
- महिला अधिकार और लैंगिक समानता (Gender Equality) का कड़ा संदेश देना।
- राष्ट्रीय एकता और समान नागरिक अधिकारों की पुरजोर वकालत करना।
- भाजपा के कोर वोटरों को वैचारिक रूप से मजबूत और एकजुट करना।
- उत्तराखंड के बाद मध्यप्रदेश को अगले बड़े ‘UCC लागू करने वाले राज्य’ के रूप में स्थापित करना।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की यह पहल सिर्फ एक नया कानून बनाने तक सीमित नहीं है। सीएम मोहन यादव का यह कदम साफ बता रहा है कि वे बिना किसी हड़बड़ी के, समाज के हर वर्ग की राय लेकर ही इस पर आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में और भी ज्यादा गरमाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विरोधियों के सवालों और आदिवासियों व अल्पसंख्यकों की चिंताओं को दूर करते हुए इस कानून को जमीन पर कैसे उतारती है।