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May 6, 2026 4:53 pm

गरोठ: नीमच-झालावाड़ हाईवे के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, उपजाऊ भूमि और संतरे के बगीचों को बचाने की गुहार





गरोठ: हाईवे के विरोध में ग्रामीणों का ज्ञापन

गरोठ (यशस्वी दुनिया न्यूज़)। विकास और आजीविका के बीच छिड़ी जंग अब गरोठ क्षेत्र की सड़कों पर उतर आई है। प्रस्तावित नीमच-झालावाड़ हाईवे के मार्ग को लेकर ग्रामीणों ने गहरा विरोध दर्ज कराया है। क्षेत्र के बोरखेड़ी, गरोठ बावड़ी खेड़ा और पिपल्या जत्ती गांव के किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री के नाम एसडीएम को एक सशक्त ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि और हजारों फलदार वृक्षों की बलि देकर होने वाला विकास उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

Fertile Agriculture Land Garoth

दांव पर लगी आजीविका: गरोठ के ये संतरा बगीचे और उपजाऊ भूमि हाईवे की भेंट चढ़ सकते हैं।

उपजाऊ भूमि और संतरा बगीचों पर अस्तित्व का संकट

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में प्रस्तावित नीमच-झालावाड़ हाईवे के लिए किए गए सर्वे में उनके गांवों से होकर सड़क निकालने का विकल्प शामिल किया गया है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता इस क्षेत्र की अत्यंत उपजाऊ दोमट काली मिट्टी को लेकर है, जो इस इलाके के किसानों के लिए ‘सफेद सोना’ उगलने वाली भूमि मानी जाती है। प्रस्तावित मार्ग के कारण न केवल सैकड़ों बीघा कृषि भूमि बर्बाद हो जाएगी, बल्कि लगभग हजारों फलदार वृक्ष, विशेष रूप से लहलहाते संतरे के बगीचे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।

‘प्राकृतिक धरोहर और ग्रामीण जीवन का प्रश्न’

ग्रामीणों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल भूमि अधिग्रहण का विषय नहीं है, बल्कि यह उनकी प्राकृतिक धरोहर, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण जीवन के अस्तित्व का प्रश्न है। बोरखेड़ी और आसपास के गांव एक प्राकृतिक और शांत क्षेत्र हैं, जहां की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी है। हाईवे के आने से क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित होगा और ग्रामीणों की जीविका का प्रमुख साधन हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

चार वैकल्पिक मार्ग पहले से उपलब्ध, फिर यह मार्ग क्यों?

ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने एक बड़ा तर्क यह रखा है कि इस परियोजना के लिए चार वैकल्पिक मार्ग पूर्व से ही उपलब्ध हैं। जब कम नुकसान वाले विकल्प मौजूद हैं, तब ऐसे संवेदनशील और समृद्ध कृषि क्षेत्र को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्यों उपजाऊ जमीन और फलदार बगीचों को उजाड़ने वाले मार्ग को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य विकल्पों से पर्यावरण और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • तत्काल निरस्तीकरण: इन गांवों से होकर प्रस्तावित हाईवे के विकल्प को तत्काल निरस्त किया जाए।
  • वैकल्पिक मार्ग को प्राथमिकता: उपलब्ध अन्य चार वैकल्पिक मार्गों में से किसी एक को प्राथमिकता दी जाए जिससे कम से कम कृषि हानि हो।
  • आजीविका की सुरक्षा: ग्रामीणों की जीविका, पर्यावरण और समृद्ध कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

‘विकास ऐसा हो जो विनाश न लाए’

ज्ञापन के अंत में ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे राज्य की प्रगति और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का समर्थन करते हैं, परंतु ऐसा विकास जो कृषि और पर्यावरण को स्थायी नुकसान पहुंचाए, वह जनहित में नहीं हो सकता। ग्रामीणों को पूर्ण विश्वास है कि सरकार जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान और ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष पुरजोर वकालत की। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।


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