कोटा/सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर जंक्शन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण और आरामदायक सुविधा की शुरुआत की गई है। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल द्वारा यहाँ एक अत्याधुनिक “प्रीमियम वातानुकूलित सशुल्क प्रतीक्षालय” (Paid AC Waiting Room) प्रारंभ किया गया है। इस प्रतीक्षालय में यात्रियों को बेहद कम और नाममात्र के शुल्क पर आधुनिक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

Sawai Madhopur AC Waiting Room

सवाई माधोपुर जंक्शन पर नवनिर्मित प्रीमियम वातानुकूलित प्रतीक्षालय

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कोटा मंडल में इस प्रकार की पहली अनूठी सुविधा

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि सवाई माधोपुर जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग 20,000 यात्रियों का आवागमन होता है। यह स्टेशन प्रसिद्ध रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान एवं अन्य ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों का मुख्य प्रवेश द्वार है, जिसके कारण यहाँ बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं। यात्रियों और पर्यटकों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस प्रीमियम प्रतीक्षालय की योजना बनाई गई है।

प्रवेश शुल्क मात्र ₹10 प्रति घंटा

रेलवे ने इस लग्जरी प्रतीक्षालय का शुल्क बहुत ही कम रखा है ताकि हर वर्ग का यात्री इसका लाभ उठा सके:

  • वयस्क यात्री: मात्र ₹10 प्रति घंटा
  • बच्चे (5 से 12 वर्ष): ₹5 प्रति घंटा
  • शिशु (5 वर्ष से कम): निःशुल्क प्रवेश

निर्धारित समय-सीमा से अधिक रुकने पर अगले घंटे का सामान्य शुल्क देय होगा।

Waiting Room Facilities
Waiting Room Reception

प्रतीक्षालय में उपलब्ध आरामदायक सोफे और अन्य सुविधाएं

एक ही छत के नीचे वाईफाई और जलपान की सुविधा

इस वातानुकूलित प्रतीक्षालय में यात्रियों के आराम का पूरा ध्यान रखा गया है। यहाँ आरामदायक सोफे, हाई-स्पीड वाईफाई, शुद्ध पेयजल और टीवी की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त:

  • कैफेटेरिया/जलपान गृह: जहाँ सभी खाद्य एवं पेय पदार्थ उचित MRP पर उपलब्ध होंगे।
  • अन्य सुविधाएं: गर्म पानी, सशुल्क साफ-सुथरे शौचालय तथा यात्रा सहायता डेस्क (Help Desk)।

यह प्रतीक्षालय 5 वर्ष की अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दिया गया है, जिससे रेल प्रशासन को रखरखाव के खर्च में बचत होने के साथ-साथ अच्छा राजस्व भी प्राप्त हो रहा है। रेलवे का यह कदम यात्रियों को स्टेशन पर गरिमापूर्ण और तनावमुक्त प्रतीक्षा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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कैलाश विश्वकर्मा