रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)
नीमच जमीन फर्जीवाड़ा EOW: फर्जी वारिस बनाकर 2 हेक्टेयर जमीन हड़पने का बड़ा मामला, पंचायत से तहसीलदार तक कई अधिकारी आरोपी
नीमच (बैसला): मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम बैसला में फर्जीवाड़े और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस नीमच जमीन फर्जीवाड़ा EOW (Neemuch Land Scam EOW) मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) मुख्यालय भोपाल ने जांच के बाद फर्जी वारिस प्रमाण पत्र, गलत वंशावली और अवैध नामांतरण के आधार पर लगभग 2 हेक्टेयर कृषि भूमि हड़पने के मामले में कई अधिकारियों और लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन पर कब्जे की साजिश
EOW की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी भगवान मीणा ने अपने पिता के नाम में कूट रचित बदलाव कर खुद को मृतक केदार मीणा का पुत्र और एकमात्र वारिस घोषित कर दिया। इसी मनगढ़ंत जानकारी के आधार पर ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर एक सोची-समझी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने बिना किसी सत्यापन के गलत वारिस प्रमाण पत्र जारी कर दिया। वहीं, पटवारी ने गलत वंशावली और पंचनामा तैयार किया, जिसे आधार मानकर तत्कालीन तहसीलदार ने बिना उचित जांच-पड़ताल किए जमीन के नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।
पंचायत से लेकर राजस्व विभाग तक मिलीभगत का आरोप
इस पूरे नीमच जमीन फर्जीवाड़ा मामले में ग्राम पंचायत बैसला की तत्कालीन सरपंच प्रेमलता अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार और तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा बी.के. मकवाना पर पद के दुरुपयोग और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि सभी ने मिलकर नियमों को दरकिनार किया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेशकीमती जमीन का नामांतरण आरोपी भगवान मीणा के पक्ष में कर दिया।
लगभग 2 हेक्टेयर जमीन का अवैध नामांतरण
मृतक केदार मीणा की 2 हेक्टेयर कृषि भूमि को इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे भगवान मीणा के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके बाद आरोपी ने तहसील न्यायालय रामपुरा में आवेदन देकर खुद को वैध वारिस साबित करने की भी कोशिश की। जांच में स्पष्ट हुआ कि राजस्व रिकॉर्ड में व्यापक हेरफेर कर भूमि को आरोपी के नाम दर्ज किया गया, जिससे मृतक के वास्तविक और वैध वारिसों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
आरोपियों की सूची जिन पर हुई FIR
इस गंभीर मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है, उनमें शामिल हैं:
- भगवान मीणा, निवासी बैसला, तहसील रामपुरा, जिला नीमच (मुख्य आरोपी)
- प्रेमलता अमर रावत, तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत बैसला
- आनंद सक्सेना, तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत बैसला
- अनुराग पाटीदार, तत्कालीन पटवारी
- बी.के. मकवाना, तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा
- तथा अन्य अज्ञात व्यक्ति
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज और जांच तेज
EOW भोपाल ने अपनी प्राथमिक जांच में पाया कि यह पूरा मामला सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सरकारी पद के खुले दुरुपयोग से जुड़ा है। इसके आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471, 120बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 और 12 के तहत कड़ा मामला दर्ज किया गया है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड की और भी गहन जांच की जा रही है और जल्द ही इस मामले में गिरफ्तारियां होना तय माना जा रहा है।
ग्रामीणों में चर्चा, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यदि राजस्व विभाग की प्रक्रिया का सही और पारदर्शी ढंग से पालन होता, तो दिन-दहाड़े इतनी बड़ी जमीन हड़पने की घटना कभी संभव नहीं थी। यह मामला एक बार फिर राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की सख्त आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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