क्रूड ऑयल में उछाल: भारत में फिर बढ़े पेट्रोल डीजल के दाम, मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे तेल में लगी आग



क्रूड ऑयल में उछाल: भारत में फिर बढ़े पेट्रोल डीजल के दाम, मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे तेल में लगी आग

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही लगातार तेजी के बीच भारत में एक बार फिर पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग रूट बाधित होने के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पिछले 10 दिनों में तीसरी बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है। आज यानी 23 मई 2026 को देश में पेट्रोल की कीमतों में करीब 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।

इस नई बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख महानगरों और राज्यों में ईंधन की कीमतें अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे पहले तेल कंपनियों ने 15 मई और 19 मई को भी ईंधन के दामों में बढ़ोतरी की थी। जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को और भी महंगे पेट्रोल-डीजल का सामना करना पड़ सकता है।

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मिडिल ईस्ट संकट और हॉरमुज जलडमरूमध्य का प्रभाव

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस भारी उछाल का मुख्य कारण मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष है। विशेष रूप से हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले तेल के परिवहन में आई रुकावटों ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। हॉरमुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहां से दुनिया के कुल तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग के आंशिक रूप से बंद होने या असुरक्षित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई शॉक पैदा हो गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर भारत में पेट्रोल डीजल के दाम को प्रभावित करता है।

सरकार और तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव

उल्लेखनीय है कि सरकारी तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए लंबे समय तक (अप्रैल 2022 से) खुदरा कीमतों को स्थिर रखा था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने के कारण तेल कंपनियों का घाटा (Under-recoveries) काफी बढ़ गया था। अपने नुकसान को कम करने और तेल आयात के संतुलन को बनाए रखने के लिए तेल कंपनियों को मई 2026 से कीमतों में चरणबद्ध बदलाव (Staggered Revisions) करने पर मजबूर होना पड़ा है।

बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी स्थिति पर नजर बनाई हुई है। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पूर्व में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती जैसे कदम उठाए थे और जरूरत पड़ने पर एक बार फिर करों में कटौती पर विचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार वैकल्पिक मार्गों से सुरक्षित तेल आयात सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है।

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महत्वपूर्ण बाहरी कड़ियाँ (External Resources):

  • अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के लाइव अपडेट के लिए देखें: Reuters Commodities Market
  • भारत सरकार का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय: Ministry of Petroleum and Natural Gas
  • वैश्विक तेल व्यापार और हॉरमुज जलडमरूमध्य का महत्व: Wikipedia – Strait of Hormuz


कैलाश विश्वकर्मा