शामगढ़/भवानीमंडी: जोधपुर से इंदौर जाने वाली रणथंभौर एक्सप्रेस (ट्रेन 12466) में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक वांछित अपराधी ने पुलिस अभिरक्षा से भागने का दुस्साहसिक प्रयास किया। एनडीपीएस (NDPS Act) के एक गंभीर मामले में वांछित वारंटी आरोपी ने पुलिस को गच्चा देने के लिए चलती ट्रेन से कूदकर (Jumping from moving train) छलांग लगा दी। हालांकि, उसकी यह कोशिश आत्मघाती साबित हुई और गंभीर चोटें आने के कारण ट्रैक पर ही तड़प-तड़पकर उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस सनसनीखेज घटना के बाद रेलवे ट्रैक से लेकर शामगढ़ सिविल अस्पताल तक हड़कंप मच गया और अस्पताल परिसर भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील हो गया।

यह चौंकाने वाला घटनाक्रम भवानीमंडी रेलवे स्टेशन से महज कुछ किलोमीटर पहले धुंआखेड़ी रेलवे स्टेशन के आउटर क्षेत्र में घटित हुआ। मृत आरोपी की पहचान अब्दुल सलाम पिता जलालुद्दीन, निवासी कोटा (राजस्थान) के रूप में की गई है। आरोपी के फरार होने और मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए शामगढ़ और भवानीमंडी पुलिस के आला अधिकारी सक्रिय हो गए। हाल ही में इस क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए कई पुलिस कार्रवाइयां की गई हैं, जिसमें नशा तस्करों के खिलाफ शामगढ़ थाना प्रभारी कपिल सौराष्ट्रीय के नेतृत्व में की गई बड़ी कार्रवाई शामिल है। अब पुलिस अभिरक्षा से भागने की कोशिश में आरोपी की मौत ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शौचालय जाने का बहाना और ट्रेन के दरवाजे से छलांग

घटना की विस्तृत पृष्ठभूमि के अनुसार, राजस्थान की भवानीमंडी थाना पुलिस की एक टीम एनडीपीएस मामले के वांछित वारंटी आरोपी अब्दुल सलाम को गिरफ्तार कर ट्रेन संख्या 12466 जोधपुर-इंदौर रणथंभौर एक्सप्रेस से भवानीमंडी ला रही थी। पुलिसकर्मी मुस्तैद थे, लेकिन आरोपी के दिमाग में भागने का एक खतरनाक प्लान चल रहा था।

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ट्रेन जब धुंआखेड़ी रेलवे स्टेशन के आउटर क्षेत्र में धीमी हुई, तो आरोपी अब्दुल सलाम ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से शौचालय जाने की गुहार लगाई। पुलिसकर्मी उसे ट्रेन के टॉयलेट की ओर ले गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जैसे ही आरोपी शौचालय के दरवाजे के पास पहुंचा, उसने अचानक एक झटके के साथ पुलिसकर्मियों के हाथों को छुड़ाया और पलक झपकते ही ट्रेन के मुख्य दरवाजे से नीचे छलांग लगा दी। चलती ट्रेन से गिरने के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पत्थरों व पोल से टकराता हुआ रेलवे ट्रैक के किनारे जा गिरा। सिर और छाती में गंभीर चोटें आने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

जीआरपी शामगढ़ मौके पर पहुंची, अस्पताल में मचा हड़कंप

आरोपी के अचानक कूदने से सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस ने तत्काल आपातकालीन ब्रेक लगवाए और घटना की सूचना जीआरपी (GRP) शामगढ़ को दी। सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस बल और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर रवाना हुआ। पुलिस ने धुंआखेड़ी आउटर से आरोपी के शव को बरामद किया और उसे शामगढ़ सिविल अस्पताल लाया गया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए शामगढ़ सिविल अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अस्पताल परिसर में भवानीमंडी पुलिस (राजस्थान), राजस्थान जीआरपी, जीआरपी शामगढ़ और शामगढ़ थाने का पुलिस बल मुस्तैद रहा। देखते ही देखते पूरा अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में बदल गया। शव का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी बीच मृत आरोपी के परिजनों को भी घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद वे भी शामगढ़ सिविल अस्पताल पहुंचे। पुलिस कस्टडी में मौत (Custodial Death) का मामला होने के कारण प्रशासनिक और न्यायिक पहलुओं से भी जांच की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अभिरक्षा पर खड़े हुए सवाल

इस सनसनीखेज घटना ने अपराधियों के दुस्साहस और पुलिस अभिरक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों के आरोपियों को लाते समय हथकड़ी लगाने और सुरक्षा घेरे को लेकर जो नियम हैं, उनका पालन किस सीमा तक किया गया था, इसकी गहन जांच की जा रही है। मंदसौर और रतलाम जिले में लगातार वारंटियों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, जैसे कि हाल ही में मंदसौर पुलिस की कॉम्बिंग गश्त के दौरान कई फरार अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अभिरक्षा से भागने की ऐसी जानलेवा कोशिशें पुलिस के लिए एक नई चुनौती बन गई हैं।

जीआरपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है। ट्रेन के भीतर मौजूद यात्रियों और एस्कॉर्ट टीम में शामिल पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना की वास्तविक कड़ियों को जोड़ा जा सके। इस मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से यह घटना काफी चर्चा का विषय बनी हुई है, विशेषकर उन यात्रियों के लिए जो कोटा और शामगढ़ के बीच नियमित यात्रा करते हैं, जैसे कि हाल ही में शुरू हुई कोटा-ujjain सीधी मेमू ट्रेन सेवा के यात्री।

चलते-चलते: कस्टोडियल सुरक्षा और कानून की सीमाएं

पुलिस अभिरक्षा से भागने का प्रयास करना अपराधियों की हताशा को दर्शाता है। लेकिन चलती ट्रेन से कूदकर भागने जैसा जानलेवा कदम उठाना न केवल कानून की नजर में अपराध है, बल्कि यह जीवन को भी समाप्त कर देता है। कस्टोडियल सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढील ऐसे हादसों को जन्म देती है। इस घटना से सबक लेकर पुलिस प्रशासन को अपराधियों के परिवहन (Transportation of Criminals) के दौरान सुरक्षा नियमों को और अधिक कड़ा करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की कस्टोडियल मौतों और फरार होने की कोशिशों को रोका जा सके। फिलहाल, जीआरपी पुलिस मर्ग कायम कर मामले की विस्तृत न्यायिक जांच में जुटी हुई है।


कैलाश विश्वकर्मा

कैलाश विश्वकर्मा

मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)

कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और स्थानीय शासन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।

– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया

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