एमपी पुलिस एसआई तबादला सूची: 118 उप निरीक्षकों के थोकबंद ट्रांसफर, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हुई वापसी और नई तैनाती

रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)

एमपी पुलिस एसआई तबादला सूची: 118 उप निरीक्षकों के थोकबंद ट्रांसफर, नक्सल क्षेत्रों (बालाघाट-मंडला) से हुई वापसी और नई तैनाती

भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ), भोपाल ने राज्य में उप निरीक्षकों (SI) के बड़े पैमाने पर थोकबंद तबादले किए हैं। 22 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, एमपी पुलिस एसआई तबादला सूची (MP Police SI Transfer List) में कुल 118 उप निरीक्षकों को इधर से उधर किया गया है। यह तबादला आदेश मुख्य रूप से नक्सल प्रभावित जिलों (बालाघाट और मंडला) में पदस्थ अधिकारियों के कार्यकाल पूरा होने और नए अधिकारियों की वहां तैनाती को लेकर जारी किया गया है।

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नक्सल क्षेत्र से 59 SI की हुई वापसी

पुलिस महानिदेशक (प्रशासन), मध्यप्रदेश की ओर से जारी इस एमपी पुलिस एसआई तबादला सूची के अनुसार, ऐसे 59 उप निरीक्षक जिन्होंने नक्सल प्रभावित बालाघाट और मंडला जिलों में अपनी 2 वर्ष की निर्धारित सेवा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है, उन्हें वापस अन्य जिलों में स्थानांतरित किया गया है। इन अधिकारियों को अब इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, शिवपुरी, नीमच, रतलाम, और देवास जैसे विभिन्न जिलों में नई पदस्थापना दी गई है।

59 नए उप निरीक्षकों को भेजा गया बालाघाट-मंडला

वहीं दूसरी ओर, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और निरंतर बनाए रखने के लिए 59 अन्य उप निरीक्षकों को 2 साल की अवधि के लिए बालाघाट और मंडला जिलों में पदस्थ किया गया है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न हिस्सों जैसे आगर मालवा, शहडोल, विदिशा, छतरपुर, उज्जैन, इंदौर (शहर), और ग्वालियर आदि से स्थानांतरित कर नक्सल मोर्चे पर तैनाती दी गई है।

तत्काल प्रभाव से आदेश लागू

पुलिस स्थापना बोर्ड के अनुमोदन के पश्चात जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित उप निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना इकाई के लिए कार्यमुक्त होना होगा। यदि कोई अधिकारी निलंबन में है, तो उसे कार्यमुक्त न करते हुए पुलिस मुख्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह तबादला आदेश मध्यप्रदेश शासन की स्थानांतरण नीति-2025 के अनुरूप जारी किया गया है।

चुनाव और सुरक्षा के लिहाज से अहम फेरबदल

नक्सल प्रभावित जिलों में पुलिस बल का यह बड़ा फेरबदल सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2 साल का कठिन कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों की वापसी से उन्हें राहत मिली है, वहीं नए ऊर्जावान अधिकारियों को अब नक्सल मोर्चे पर अपनी सेवाएं देने का अवसर मिलेगा।

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कैलाश विश्वकर्मा