रिपोर्ट: कैलाश विश्वकर्मा (संपादक, यशस्वी दुनिया)
मंदसौर मगरमच्छ का हमला: जबड़े से अपने मासूम को छीन लाई मां, 5 वर्षीय लाल को दी दूसरी जिंदगी
मंदसौर: दुनिया में एक मां अपने बच्चों के लिए हर खतरे और मुश्किल से लड़ जाती है। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मंदसौर मगरमच्छ का हमला (Mandsaur Crocodile Attack) का मामला सामने आया है। मंदसौर जिले के हमीरगढ़ (भानपुरा तहसील) की रहने वाली एक मां, फोरीबाई ने अदम्य साहस दिखाते हुए अपने कलेजे के टुकड़े को मौत के मुंह (मगरमच्छ के जबड़े) से सुरक्षित वापस खींच लिया।
तालाब में कपड़े धो रही थी मां, तभी आया मगरमच्छ
यह खौफनाक घटना गुरुवार शाम की है। मिली जानकारी के अनुसार, भानपुरा तहसील के कंवरपुरा-सांजलपुर के बीच स्थित एक बड़े तालाब में हमीरगढ़ की रहने वाली महिला फोरीबाई कपड़े धो रही थी। वहीं पास में ही पानी के किनारे उसका 5 वर्षीय बेटा दारासिंह खेल रहा था।
तभी अचानक एक विशाल मगरमच्छ पानी से बाहर आया और उसने झपट्टा मारकर 5 वर्षीय बालक के पैर को अपने मजबूत जबड़े में जकड़ लिया। इससे पहले कि मगरमच्छ मासूम बच्चे को गहरे पानी में खींच ले जाता, मां फोरीबाई ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसने बिना एक पल गंवाए झटके से बेटे को अपनी तरफ खींचा और किनारे की तरफ दौड़ लगा दी।
मासूम के पैर में आए 18 टांके
इस जानलेवा मंदसौर मगरमच्छ हमले में मगरमच्छ के नुकीले दांत लगने की वजह से मासूम दारासिंह के पैर में गहरा घाव हो गया है। घायल बच्चे को तुरंत इलाज के लिए भानपुरा स्थित शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसके पैर में 18 टांके लगाए हैं।
पीछे पलट कर देखा तो पानी में जा चुका था मगरमच्छ
अतुलनीय साहस और समझदारी का परिचय देने वाली फोरीबाई ने वन अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया, “मैं किनारे पर बैठकर कपड़े धो रही थी और बच्चा पास ही पानी में खेल रहा था। अचानक मगरमच्छ ने आकर मेरे बेटे का पैर पकड़ लिया। मैंने बेटे को पूरी ताकत से पानी के बाहर खींचा और किनारे पर दौड़ लगा दी। जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मगरमच्छ वापस गहरे पानी में जा चुका था।”
चंबल के बैक वाटर के कारण रहता है मगरमच्छों का खतरा
इस पूरी घटना पर वन विभाग के रेंजर अंकित भदोरिया ने जानकारी दी कि “इस क्षेत्र में चंबल नदी का बैक वाटर आता है, जिसके कारण यहां अक्सर मगरमच्छों के आने की संभावना बनी रहती है। घायल हुए बालक का उपचार वन विभाग द्वारा करवाया जा रहा है। यदि यह मगरमच्छ दोबारा ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो वन विभाग की टीम द्वारा उसका रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा।”
राहत की बात यह है कि मगरमच्छ के हमले से घायल हुए 5 वर्षीय दारासिंह को प्राथमिक इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। हालांकि, बच्चा अब भी इस खौफनाक हमले के कारण घबराया हुआ है और उसकी मां उसे अपनी नजरों से एक पल के लिए भी दूर नहीं होने दे रही है।
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