भानपुरा पुलिस की सूझबूझ से लौटा दिल्ली से लापता हुआ बालक; घर से चुराए 20 लाख के जेवर प्रेमिका के पास से बरामद


थाना भानपुरा पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता से सुलझाया मामला
मंदसौर (भानपुरा): मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ की एक नई मिसाल पेश की है। पुलिस ने न केवल दिल्ली से लापता हुए एक 17 वर्षीय किशोर को सकुशल बरामद किया है, बल्कि उसके घर से गायब हुए लगभग 20 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण भी बरामद कर लिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किशोरावस्था का प्रेम प्रसंग और एक सोची-समझी साजिश सामने आई है।
जिला पुलिस अधीक्षक (SP) **श्री विनोद कुमार मीणा** के कुशल निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक **श्रीमती हेमलता कुरील** और एसडीओपी गरोठ **श्री विजय यादव** के मार्गदर्शन में भानपुरा थाना प्रभारी निरीक्षक **आर.सी. डांगी** और उनकी टीम ने इस जटिल गुत्थी को सुलझाने में सफलता हासिल की है।
एम्स दिल्ली से अचानक लापता हो गया था बालक
घटना का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि थाना भानपुरा क्षेत्र के ग्राम बाबुल्दा का रहने वाला 17 वर्षीय बालक (परिवर्तित नाम कार्तिक) गत 20 अप्रैल 2026 को अपनी मां के इलाज के सिलसिले में उनके साथ एम्स (AIIMS) दिल्ली गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान ही अचानक वह वहां से बिना बताए कहीं चला गया।
परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिला तो उन्होंने दिल्ली के संबंधित थाने में उसकी गुमशुदगी (Missing Report) दर्ज कराई। इसी बीच, जब परिवार के अन्य सदस्य भानपुरा स्थित अपने घर पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि घर की अलमारी से कीमती जेवर गायब हैं। इस पर परिजनों के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत भानपुरा थाने में चोरी की सूचना दी।
जांच में खुला प्रेम प्रसंग और साजिश का राज
एक ही परिवार से जुड़े इस दोहरे संकट (बच्चे का गायब होना और जेवरों की चोरी) को पुलिस ने अत्यंत गंभीरता से लिया। थाना प्रभारी आर.सी. डांगी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) और स्थानीय स्तर पर पूछताछ शुरू की, तो मामला परत-दर-परत खुलता चला गया।
जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि बालक कार्तिक का अपनी ही एक परिचित युवती (परिवर्तित नाम अंशिका) के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। कार्तिक ने घर से निकलने और दिल्ली जाने से पहले ही अपनी मां की अलमारी से सोने और चांदी के सारे कीमती आभूषण निकाल लिए थे और उन्हें अंशिका को सौंप दिया था। यह पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी।
20 लाख के जेवर बरामद, पुलिस के डर से थाने पहुंचा बालक
सच्चाई सामने आते ही भानपुरा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए संदेही युवती अंशिका से कड़ी पूछताछ की। पहले तो उसने टालमटोल करने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी सबूत सामने रखे तो उसने जेवर छुपाने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने अंशिका के कब्जे से चोरी गए सारे आभूषण सकुशल बरामद कर लिए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग **20 लाख रुपये** आंकी गई है।
बरामद किए गए जेवरों में शामिल हैं:
- सोने की चूड़ियां और मंगलसूत्र
- सोने की अंगूठियां और चैन
- कानों के टॉप्स
- चांदी की पायजेब और बिछिया
इधर, जैसे ही पुलिस की इस कड़ी कार्रवाई और जेवरों की बरामदगी की खबर दिल्ली में मौजूद कार्तिक तक पहुंची, वह घबरा गया। उसे समझ आ गया कि अब कानून से बचना मुश्किल है। इसके बाद वह स्वयं ही 5 मई 2026 को दिल्ली के सफदरजंग पुलिस थाने पहुंचा और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली पहुंचे और उसे सकुशल घर वापस लेकर आए हैं। पुलिस अब मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
भानपुरा पुलिस की कार्यशैली की हर तरफ प्रशंसा
यह कार्रवाई केवल एक गुमशुदगी और चोरी के मामले का खुलासा नहीं है, बल्कि यह भानपुरा पुलिस की सतर्कता और पेशेवर जांच का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भानपुरा पुलिस ने हमेशा ही जटिल मामलों को समय रहते सुलझाया है। चाहे वह दूधाखेड़ी का चर्चित धनराज अंधा हत्याकांड हो या फिर शम्भू सिंह अंधा हत्याकांड, पुलिस ने हमेशा जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा है।
अभिभावकों के लिए बड़ी सीख और जनसंदेश
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने समाज और विशेष रूप से अभिभावकों के लिए एक बेहद जरूरी ‘जनसंदेश’ जारी किया है। पुलिस का कहना है कि किशोरावस्था (Adolescence) एक बहुत ही संवेदनशील उम्र होती है। इस उम्र में बच्चे अक्सर भावनाओं में बहकर ऐसे गलत कदम उठा लेते हैं जो उनके भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डाल देते हैं।
अभिभावकों को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान:
- संगत और मोबाइल पर नजर: अपने बच्चों के दोस्तों, उनकी संगत और उनके मोबाइल के उपयोग पर पैनी लेकिन दोस्ताना नजर रखें।
- संवाद बनाए रखें: घर में ऐसा माहौल बनाएं कि बच्चे अपनी हर समस्या या भावनाएं आपसे साझा कर सकें। भाग जाना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
- सुरक्षा के प्रति सतर्कता: घर में रखे कीमती सामान और नकदी को हमेशा सुरक्षित लॉकर्स में रखें और बच्चों को भी जिम्मेदारी का अहसास कराएं।