मंदसौर (गरोठ): भीषण गर्मी के इस मौसम में ठंडी चीजें, खासकर आइसक्रीम और कुल्फी खाना बच्चों को बहुत पसंद होता है। लेकिन यही शौक कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है। मंदसौर जिले के गरोठ थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही डराने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क किनारे बिकने वाली या फेरीवालों से खरीदी गई आइसक्रीम खाने से कई मासूम बच्चों की जान आफत में पड़ गई। ग्राम कोटड़ा बुजुर्ग में कथित तौर पर आइसक्रीम खाने के बाद एक के बाद एक कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

कोटड़ा बुजुर्ग में क्या हुआ? घटना का पूरा विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गरोठ क्षेत्र के कोटड़ा बुजुर्ग गांव में बच्चों ने बोलिया (Boliya) के रहने वाले एक व्यक्ति से आइसक्रीम खरीदकर खाई थी, जो अक्सर गांव में आइसक्रीम बेचने आता है। आइसक्रीम खाने के कुछ ही घंटों के भीतर बच्चों को पेट में तेज दर्द, जी मिचलाना और उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायतें शुरू हो गईं। जब एक साथ कई घरों से बच्चों के बीमार पड़ने की खबरें आने लगीं, तो परिजनों में दहशत फैल गई। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए नजदीकी चिकित्सा केंद्रों की ओर ले जाया गया।

परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि जिन बच्चों की तबीयत नॉर्मल (सामान्य) थी, उनका उपचार गांव में ही करवा लिया गया। लेकिन जिन बच्चों की स्थिति ज्यादा गंभीर और चिंताजनक थी, उन्हें तुरंत नजदीकी शहर भवानीमंडी के निजी अस्पताल (मेट्रो अस्पताल) में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज लगातार जारी है। जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम बच्चों के इलाज और उनकी निगरानी में जुटी हुई है।

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स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर: BMO का क्या कहना है?

इस पूरी घटना पर गरोठ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. दरबार सिंह चौहान ने संज्ञान लिया है। डॉ. चौहान के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग को अब तक आधिकारिक रूप से कुल 8 बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने की पुष्टि हुई है। प्रारंभिक जांच और लक्षणों के आधार पर यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसका सीधा कारण दूषित आइसक्रीम का सेवन बताया जा रहा है।

बीएमओ डॉ. चौहान ने बताया कि, “बीमार बच्चों में से एक बच्चे की हालत चिंताजनक बनी हुई है। उसे लगातार उल्टी और दस्त हो रहे हैं, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी (Dehydration) का खतरा बना हुआ है। हमारी मेडिकल टीम उस पर कड़ी नजर रखे हुए है और सघन उपचार जारी है।”

राहत की बात यह है कि उचित इलाज मिलने के बाद एक बच्चे की हालत में सुधार आया है, जिसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉ. चौहान ने उम्मीद जताई है कि बाकी बचे 6 बच्चों की स्थिति भी स्थिर है और यदि सुधार जारी रहा तो उन्हें भी देर रात तक अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

आंकड़ों में विरोधाभास: ग्रामीणों का दावा 15 बच्चे बीमार

भले ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी 8 बच्चों के बीमार होने की पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का दावा इससे कहीं ज्यादा चिंताजनक है। गांव के लोगों का कहना है कि आइसक्रीम खाने के बाद बीमार पड़ने वाले बच्चों की कुल संख्या 15 तक हो सकती है। कई परिजनों ने शायद अपने बच्चों का इलाज गांव के ही छोटे क्लीनिक या घरेलू नुस्खों से करवा लिया हो, जिसके कारण वे आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में घर-घर जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं ताकि कोई भी बीमार बच्चा इलाज से वंचित न रहे।

पुलिस को नहीं दी गई सूचना, स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद, खबर लिखे जाने तक स्थानीय पुलिस को इस मामले की कोई औपचारिक सूचना या शिकायत नहीं दी गई है। अमूमन ऐसे मामलों में, जहां मिलावटी या दूषित खाद्य पदार्थ बेचने से कई लोगों की जान खतरे में पड़ती है, पुलिस तुरंत संज्ञान लेकर विक्रेता के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करती है।

हालांकि, घटना की भनक लगते ही स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम कोटड़ा बुजुर्ग गांव पहुंच गई है। टीम ने गांव में जांच शुरू कर दी है और आइसक्रीम बेचने वाले की तलाश की जा रही है ताकि उस आइसक्रीम के सैंपल (Samples) लिए जा सकें और उन्हें जांच के लिए लैब भेजा जा सके। फूड सेफ्टी विभाग (Food Safety Department) को भी इस मामले में अलर्ट कर दिया गया है।

गर्मियों में फूड पॉइजनिंग का बढ़ता खतरा: अभिभावकों के लिए चेतावनी

यह घटना सभी माता-पिता और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। गर्मियों के मौसम में खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध से बनी चीजों (जैसे आइसक्रीम, मावा, कुल्फी) में बैक्टीरिया पनपने की गति बहुत तेज हो जाती है। अगर इन्हें सही तापमान पर स्टोर न किया जाए या साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो ये जानलेवा जहर में तब्दील हो सकते हैं।

क्या बरतें सावधानियां?

  • खुले में बिकने वाली चीजों से बचें: फेरीवालों या सड़क किनारे ठेलों पर बिकने वाली बिना ब्रांड की आइसक्रीम और बर्फ के गोलों से बच्चों को दूर रखें। इनमें इस्तेमाल होने वाला पानी और रंग अक्सर दूषित होता है।
  • ब्रांडेड उत्पाद चुनें: हमेशा अच्छी गुणवत्ता और विश्वसनीय ब्रांड की सीलबंद आइसक्रीम ही खरीदें।
  • एक्सपायरी डेट की जांच करें: कुछ भी खरीदने से पहले उसकी निर्माण तिथि (Manufacturing Date) और समाप्ति तिथि (Expiry Date) जरूर जांच लें।
  • लक्षणों को नजरअंदाज न करें: अगर बाहर का कुछ खाने के बाद बच्चे को पेट दर्द, उल्टी, दस्त या बुखार की शिकायत हो, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू नुस्खों के भरोसे न बैठें।

प्रशासन से यह उम्मीद की जाती है कि वह इस मामले की गहन जांच करेगा और दूषित खाद्य पदार्थ बेचने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।

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कैलाश विश्वकर्मा