धार (Dhar): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित प्राचीन ‘भोजशाला’ और ‘कमाल मौला मस्जिद’ (Bhojshala-Kamal Maula Mosque Dispute) का मुद्दा एक बार फिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इस अति संवेदनशील और ऐतिहासिक विवाद पर आज एक अहम फैसला आने की उम्मीद है। अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के बाद, धार का यह मुद्दा देश के सबसे पुराने और पेचीदा धार्मिक विवादों में से एक है। लेकिन आखिर यह विवाद है क्या? हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अपने-अपने क्या दावे हैं? और इस विवाद ने धार शहर के आम जनजीवन को कैसे प्रभावित किया है? आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में इस पूरे मामले की परतें खोलते हैं।

क्या है धार भोजशाला विवाद? (The Core Dispute)

यह पूरा विवाद धार शहर के मध्य में स्थित एक प्राचीन और संरक्षित स्मारक (Protected Monument) को लेकर है। वर्तमान में इस इमारत को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित किया गया है। लेकिन इस एक ही इमारत पर दो अलग-अलग समुदाय अपना दावा पेश करते हैं:

हिंदू पक्ष का दावा: यह देवी सरस्वती का मंदिर है

हिंदू समुदाय का दृढ़ विश्वास है कि यह पूरी इमारत असल में ‘भोजशाला’ है—एक प्राचीन मंदिर और गुरुकुल जिसे 11वीं शताब्दी में परमार वंश के महान शासक ‘राजा भोज’ (King Bhoja) ने बनवाया था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, राजा भोज विद्या और कला के बड़े संरक्षक थे और उन्होंने यहाँ ज्ञान की देवी वाग्देवी (सरस्वती) की एक भव्य मूर्ति स्थापित की थी। हिंदू पक्ष का तर्क है कि बाद में आए मुस्लिम आक्रांताओं ने इस मंदिर और शिक्षा केंद्र को तोड़कर इसे एक मस्जिद का रूप दे दिया। उनका कहना है कि इमारत के खंभों पर उकेरी गई संस्कृत की लिपियां, मिटाई गई देवी-देवताओं की आकृतियां और हवन कुंड के अवशेष इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि यह एक हिंदू मंदिर है।

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मुस्लिम पक्ष का दावा: यह कमाल मौला मस्जिद है

वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय इसे ‘कमाल मौला मस्जिद’ मानता है। उनका कहना है कि 13वीं शताब्दी में मशहूर सूफी संत ‘कमालुद्दीन चिश्ती’ यहाँ आए थे और उन्होंने यहाँ अपने उपदेश दिए थे। उन्हीं के नाम पर इस मस्जिद का नाम पड़ा। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि इस जगह पर पिछले कई सौ सालों से लगातार जुमे (शुक्रवार) की नमाज अदा की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि पुराने प्रशासनिक रिकॉर्ड्स और 1935 में धार स्टेट (रियासत) द्वारा जारी किए गए आदेशों में भी इस इमारत को आधिकारिक तौर पर एक मस्जिद ही माना गया है।

वर्तमान व्यवस्था: 2003 का ऐतिहासिक फॉर्मूला

दोनों समुदायों के दावों और शहर में बढ़ते तनाव को देखते हुए साल 2003 में पुरातत्व विभाग (ASI) और प्रशासन ने एक बीच का रास्ता निकाला, जिसे आज भी लागू किया जाता है। इस ‘स्टेटस को’ (Status Quo) व्यवस्था के तहत:

  • मंगलवार: हर मंगलवार को हिंदू समुदाय को यहाँ अंदर जाकर पूजा-अर्चना करने की अनुमति है।
  • शुक्रवार (जुमा): हर शुक्रवार को दोपहर के समय मुस्लिम समुदाय यहाँ नमाज पढ़ सकता है।
  • वसंत पंचमी: हिंदू समुदाय के लिए वसंत पंचमी का दिन सबसे खास होता है, इस दिन उन्हें यहाँ विशेष पूजा और अखंड ज्योति जलाने की अनुमति मिलती है।

विवाद के कारण हुए संघर्ष और तनाव (Conflicts and Impact)

यह विवाद कागजों और अदालतों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने धार की सड़कों पर भी कई बार हिंसक रूप लिया है। जब भी ‘वसंत पंचमी’ शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो शहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि एक ही समय पर एक ही इमारत में हिंदुओं को पूजा और मुसलमानों को नमाज की अनुमति कैसे दी जाए।

साल 2006, 2013 और 2016 में जब ऐसा संयोग बना, तो शहर में भारी तनाव और पुलिस लाठीचार्ज जैसी घटनाएं देखने को मिली थीं। इन सांप्रदायिक तनावों का धार की आम जनता पर गहरा असर पड़ा है। शहर में कई बार कर्फ्यू लगे हैं, इंटरनेट बंद किया गया है और महीनों तक बाजार प्रभावित रहे हैं। एक समय जो शहर अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता था, वह लंबे समय तक इस विवाद के कारण एक छावनी में तब्दील रहा।

हाईकोर्ट का दखल और ASI सर्वे की रिपोर्ट

हाल ही में इस मामले ने तब एक नया मोड़ लिया जब मार्च 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने ASI को इस पूरे परिसर का ‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ (Scientific Survey) करने का आदेश दिया, ठीक वैसे ही जैसे ज्ञानवापी में हुआ था। ज्ञानवापी की तरह ही, एएसआई की टीम ने यहाँ कई हफ्तों तक खुदाई और जांच की। जुलाई 2024 में एएसआई ने अपनी जो विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपी, उसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि वर्तमान मस्जिद का जो ढांचा है, उसे बनाने के लिए पहले से मौजूद पुराने हिंदू मंदिरों के खंभों और पत्थरों (Repurposed components) का इस्तेमाल किया गया है। इस रिपोर्ट ने हिंदू पक्ष के दावों को और मजबूती दे दी है।

आज का फैसला क्यों है अहम?

आज इस मामले में आने वाला अदालत का फैसला न सिर्फ धार शहर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए बहुत मायने रखता है। यह फैसला तय करेगा कि एक संरक्षित इमारत का धार्मिक चरित्र (Religious Character) क्या होगा। दोनों ही समुदाय इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने भी किसी भी तरह के तनाव से निपटने के लिए पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। धार की आम जनता की बस यही उम्मीद है कि फैसला जो भी हो, शहर की शांति और भाईचारा कायम रहे।

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कैलाश विश्वकर्मा