देवास (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के देवास जिले (Dewas District) के टोंक कलां (मक्सी रोड) इलाके में गुरुवार सुबह 11:30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री (Firecracker Factory) में हुए भीषण विस्फोट ने भारी तबाही मचाई है। इस दर्दनाक हादसे में धीरज, सनी और सुमित नाम के 3 मजदूरों की मौत हो गई है। शुरुआत में 8 से 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब प्रशासन ने 3 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।
हाहाकार और तबाही का मंजर: 25 फीट दूर जाकर गिरे शवों के टुकड़े
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मृतकों के शवों के टुकड़े घटनास्थल से 20 से 25 फीट दूर जाकर गिरे। इस हादसे में 12 लोग गंभीर रूप से घायल और बुरी तरह झुलस गए हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया है। जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री में करीब 200 से ज्यादा महिलाएं काम करती थीं। प्रशासन के अनुसार, तीन महिलाएं अभी भी लापता बताई जा रही हैं, जिनकी तलाश मलबे में युद्ध स्तर पर की जा रही है। घायलों को देवास के जिला अस्पताल भेजा गया है और स्थानीय प्रशासन व राहत टीम मौके पर मुस्तैद हैं।
ब्लास्ट का कारण: बारूद बनाने में केमिकल का गलत मिश्रण
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि फैक्ट्री के अंदर दो अलग-अलग केमिकल को मिलाकर बारूद (Gunpowder) बनाया जा रहा था। इसी दौरान केमिकल की मात्रा (Ratio) सही नहीं मिलने के कारण यह भयंकर ब्लास्ट हो गया। लोगों के अनुसार, जिस हिस्से में विस्फोट हुआ, वहां उस समय 15 से 20 मजदूर काम कर रहे थे।
यह दर्दनाक हादसा लंच से करीब 15 से 20 मिनट पहले ही हुआ। कर्मचारियों का खाना भी आ चुका था, लेकिन अचानक हुए इस जोरदार धमाके के बाद लोग खाना वहीं छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागे।
CM मोहन यादव ने जताया दुख, जांच के आदेश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरी संवेदना और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि जिले के प्रभारी और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, गृह सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (Compensation) देने और सभी घायलों का मुफ्त और बेहतर इलाज सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: अवैध फैक्ट्री पर नहीं हुई थी कोई कार्रवाई
इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे कमिश्नर का घेराव कर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक अवैध फैक्ट्री थी और प्रशासन द्वारा इसके खिलाफ पहले कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि इस फैक्ट्री में करीब 400 से 500 मजदूर काम करते थे। शोषण का आलम यह था कि फैक्ट्री में काम करने वाले पुरुष मजदूरों को 400 रुपये और महिला मजदूरों को महज 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती थी, जिसका भुगतान हर हफ्ते किया जाता था।
लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के हर लाइव अपडेट और जांच की पल-पल की जानकारी के लिए ‘यशस्वी दुनिया’ न्यूज़ पोर्टल के साथ जुड़े रहें।