धर्मराजेश्वर (Dharmarajeshwar): विश्व हिन्दू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) मालवा प्रांत द्वारा आयोजित विशेष परिषद शिक्षा वर्ग 2026 के अंतर्गत एक बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विहिप के मालवा प्रांत मंत्री श्री विनोद शर्मा ने “सामाजिक समरसता” (social harmony) विषय पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति आपसी एकता और समरसता में ही निहित है। उन्होंने कहा कि हमारे आराध्य भगवान श्रीराम ने अपने पूरे जीवनकाल में कभी भी जाति या वर्ग के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया, जो कि आज के समाज के लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत है।
बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के साथ मालवा प्रांत के प्रांत उपाध्यक्ष श्री महेश गोठी भी मंचासीन रहे। धर्मराजेश्वर, चंदवासा और शामगढ़ क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में आयोजित इस शिक्षा वर्ग का उद्देश्य समाज सेवा, राष्ट्रीय चेतना और वैचारिक परिपक्वता का विकास करना है। इस क्षेत्र में सामाजिक एकता और जनसहयोग के अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं, जैसे हाल ही में चंदवासा में जनसहयोग से बनाई जा रही क्षेत्र की सबसे बड़ी धर्मराजेश्वर धाम गौशाला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं।

विवरण: बौद्धिक सत्र में शिक्षार्थियों को संबोधित करते विहिप मालवा प्रांत मंत्री श्री विनोद शर्मा।
भगवान श्रीराम का जीवन: सामाजिक समरसता का सर्वोच्च आदर्श
प्रांत मंत्री श्री विनोद शर्मा ने भगवान श्रीराम के जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रभु श्रीराम का संपूर्ण जीवन ही सामाजिक समरसता का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को गले लगाया और सभी को आदर प्रदान किया। वनवास काल के दौरान उन्होंने सबसे पहले निषादराज को आलिंगनबद्ध किया, जो तत्कालीन समाज के वंचित वर्ग के प्रतिनिधि थे।
इसी प्रकार, वन में उन्होंने भील समाज की माता शबरी के आश्रम पहुंचकर उनके द्वारा प्रेम से दिए गए जूठे बेरों को आत्मीयता से ग्रहण किया। केवट को गले लगाकर और वानर-भालू समाज को साथ लेकर उन्होंने अन्याय के विरुद्ध एक बड़ा संघर्ष लड़ा। विहिप नेता ने जोर देकर कहा कि प्रभु राम की दृष्टि में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं था। उन्होंने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समान सम्मान देकर एक समरस राष्ट्र की आधारशिला रखी थी।
वैदिक वर्ण व्यवस्था: जन्म नहीं, कर्म पर आधारित थी
अपने बौद्धिक संबोधन में विहिप प्रांत मंत्री ने सनातन समाज की प्राचीन व्यवस्थाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की मूल वैदिक वर्ण व्यवस्था में कभी भी जन्म के आधार पर भेदभाव नहीं था। वेदों और उपनिषदों में वर्णित व्यवस्था पूरी तरह से व्यक्ति के गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित थी। समाज में किसी भी व्यक्ति का सम्मान उसके जन्म से नहीं बल्कि उसके आचरण और समाज के प्रति उसके योगदान से निर्धारित होता था।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यकाल में आई संकीर्ण सोच और कुरीतियों के कारण समाज में छुआछूत और ऊँच-नीच जैसी विकृतियाँ पैदा हो गईं, जिसने हिंदू समाज को अंदर से कमजोर किया। यह विकृतियाँ सनातन धर्म का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि बाहरी प्रभाव और कुरीतियों की देन हैं। वर्तमान समय में हमें पुनः उन वैदिक आदर्शों को अपनाना होगा जहाँ हर नागरिक को समान गरिमा और अधिकार प्राप्त हों। समाज के सभी वर्गों में यह सौहार्द और भाईचारा बना रहना चाहिए, जैसा कि हाल ही में गरोठ में बकरा ईद का पर्व सौहार्द के साथ मनाने के दौरान देखने को मिला था, जहाँ विभिन्न समुदायों ने आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की थी।
विवरण: धर्मराजेश्वर में आयोजित शिक्षा वर्ग शिविर में उपस्थित सैकड़ों विहिप शिक्षार्थी व कार्यकर्ता।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और आधुनिक समाज सुधारकों का संदेश
श्री शर्मा ने सामाजिक समरसता की निरंतरता को स्पष्ट करने के लिए प्रभु श्रीराम से लेकर संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर तक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने भी हिंदू समाज में फैली असमानता, जातिवाद और अस्पृश्यता के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया। बाबासाहेब का भी यही मानना था कि समाज जब तक जातिगत बंधनों से मुक्त होकर एकजुट नहीं होगा, तब तक एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र का सपना पूरा नहीं हो सकता।
विनोद शर्मा ने शिक्षा वर्ग में भाग ले रहे शिक्षार्थियों से अपील की कि वे यहाँ से जो सीख लेकर जा रहे हैं, उसे अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में अपनाएं। उन्होंने कहा, “हमारा दायित्व है कि हम समाज के प्रत्येक वर्ग के पास जाएं, उनसे आत्मीय संबंध बनाएं और उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि हम सभी एक ही विशाल समाज का हिस्सा हैं।”
बौद्धिक सत्र में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी
यह विशेष बौद्धिक सत्र धर्मराजेश्वर के पवित्र परिसर में संपन्न हुआ, जिसमें वर्ग के विभिन्न अधिकारी, शिक्षक और मालवा प्रांत से आए सैकड़ों शिक्षार्थी उपस्थित रहे। विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष राजेश पाटीदार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि संगठन द्वारा समाज में समरसता लाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार यात्राएं, सेवा बस्तियों का संचालन और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने समाज को संगठित करने और कुरीतियों के उन्मूलन का संकल्प लिया।
कैलाश विश्वकर्मा
मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya)
कैलाश विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से शिक्षा, कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और स्थानीय शासन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं.
– कैलाश विश्वकर्मा, मुख्य संपादक, यशस्वी दुनिया
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