नई दिल्ली (New Delhi): आज देश की जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकार और तेल कंपनियों ने मिलकर पेट्रोल (Petrol), डीजल (Diesel) और सीएनजी (CNG) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। लंबे समय से स्थिर चल रहे ईंधन के दामों में अचानक हुए इस इजाफे ने आम आदमी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आपकी रसोई से लेकर यातायात के साधनों तक, हर जगह देखने को मिलेगा। आइए समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसा क्या हुआ जिसके कारण सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा और आम इंसान की जेब पर इसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के कारण क्यों बढ़े दाम? (International Criteria)
भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा दूसरे देशों से आयात (Import) करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जरा सा भी बदलाव सीधे तौर पर भारत के घरेलू बाजार को प्रभावित करता है।
पिछले कुछ हफ्तों से ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके मुख्य दो कारण हैं:
- ग्लोबल जियोपॉलिटिकल क्राइसिस: मिडिल-ईस्ट (मध्य पूर्व) और लाल सागर (Red Sea) में चल रहे भारी तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। जहाज कंपनियों को लंबे और महंगे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे ढुलाई की लागत (Freight Cost) बढ़ गई है।
- ओपेक प्लस (OPEC+) देशों का फैसला: सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ‘ओपेक प्लस’ ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने का निर्णय लिया है। जब सप्लाई कम होती है और डिमांड ज्यादा होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अपने आप आसमान छूने लगते हैं।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर? (Impact on Common Man)
पेट्रोल और डीजल सिर्फ वो ईंधन नहीं हैं जो हमारी गाड़ियों में डलते हैं; यह देश की पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन ईंधनों के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है देश में हर चीज का महंगा होना। एक आम आदमी की जेब पर इसका असर कुछ इस तरह पड़ेगा:
1. ट्रांसपोर्टेशन और मालभाड़ा (Freight Charges) होगा महंगा
भारत में सब्जियों से लेकर राशन और दवाइयों तक, हर चीज ट्रकों और मालवाहक वाहनों (Commercial Vehicles) के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य पहुँचती है, जो मुख्य रूप से डीजल पर चलते हैं। डीजल महंगा होते ही ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों (सब्जियां, फल, दूध, अनाज) के दामों पर पड़ेगा और वे महंगी हो जाएंगी।
2. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ेगा
सीएनजी (CNG) और डीजल के दाम बढ़ने से शहर में चलने वाले ऑटो, बस, और कैब (Ola/Uber) का किराया भी बढ़ेगा। जो लोग रोज ऑफिस या अपने काम पर जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेते हैं, उनका मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।
3. EMI और बैंक लोन पर असर (Inflation and Interest Rates)
जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो देश में महंगाई दर (Inflation Rate) तेजी से ऊपर जाती है। महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाना पड़ता है। रेपो रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि आपने बैंक से जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है, उसकी किस्तें (EMI) और भी ज्यादा महंगी हो जाएंगी। इस तरह ईंधन के दाम आपकी जेब पर दोहरा प्रहार करते हैं।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) का तर्क है कि वे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का दबाव खुद झेल रही थीं ताकि आम जनता को राहत मिल सके। लेकिन अब घाटा इतना ज्यादा बढ़ गया था कि कीमतों में संशोधन करना बेहद जरूरी हो गया था। सरकार ने आश्वासन दिया है कि ग्लोबल मार्केट में दाम कम होते ही घरेलू बाजार में भी इसका सीधा फायदा जनता तक पहुँचाया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बढ़ती महंगाई (Mahangai) से आम जनता को राहत देने के लिए टैक्स या एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कोई कटौती करती है या नहीं।
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