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Zero वाला भी हीरो? मेडिकल एजुकेशन का नया फॉर्मूला, NEET की क्वालीफाइंग पर्सेंट जीरो

Zero वाला भी हीरो? मेडिकल एजुकेशन का नया फॉर्मूला, NEET की क्वालीफाइंग पर्सेंट जीरो

8 months ago 0 12

नीट पीजी 2023 की कटऑफ को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है और इस कटऑफ को घटाकर जीरो कर दिया गया है. अब इसका असर यह होगा कि ऐसी स्थिति में अब सभी छात्र काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे. यानी जो भी छात्र अपीयर हुआ है वह अब बची हुई सीटों से संबंधित काउंसलिंग प्रोसेस में भाग ले सकेगा. मेडिकल एजुकेशन के इस नए फॉर्मूले पर विशेषज्ञों का क्या कहना है आइए समझ लेते हैं.

क्या होगा इसका असर

दरअसल, FEDERATION OF ALL INDIA MEDICAL ASSOCIATION के चेयरमैन डॉ रोहन कृष्णन का कहना है कि ये हास्यास्पद है. नीट पीजी को 2017 में इसीलिए लाया गया था ताकि हर कोई पैसे देकर सीटें ना खरीद सके और मेरिट के आधार पर उसे सीट मिले. कुछ हद तक परसेंटाइल नीचे जा सकता था. प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को इससे फायदा होगा. पिछले कुछ सालों में फीस कम होने लगी थी क्योंकि भारी फीस देने वाले कम थे. अब ज़्यादा लोग क्वालिफाई करेंगे तो फीस बढेगी. सीटें ब्लॉक की जाएंगी, private college कई तरीके फीस बढ़ाने के निकाल लेंगे.

IMA का तर्क अलग है

वहीं IMA का तर्क अलग है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय से रिक्वेस्ट की थी कि परसेंटाइल को 50 से 30 लाया जाए. इसके कुछ कारण थे जिनमें बायोकेमिस्ट्री, एनोटमी जैसी non clinical seats खाली रह जाती थी, अब बच्चे उस के लिए opt कर सकते हैं. हर साल लगभग 3 हजार PG सीटें फिर भी खाली रह जाती है. इसलिए ऐसा कहा गया था. लेकिन पिछले साल Cut off 50 से कम करके 25% करने के बाद भी सीटें खाली रह गई थीं. इसलिए सरकार ने ऐसा सोचा होगा.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ शरद अग्रवाल ने कहा कि हम सीटें तो बढा रहे हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज में बच्चे को पढाने के लिए फैकल्टी नहीं मिलता है.

  • 2014 में ये हाल था
  • 20000 पीजी
  • 58000 यूजी
  • 2023
  • 64000-70000 पीजी
  • 108000 यूजी

देश में सीटे कम?

आदर्श स्थिति में हर एमबीबीएस को पीजी सीट मिल जानी चाहिए. ये तो हमारी कमी है कि देश में सीटे कम हैं. इसीलिए हम उसे फिर से एग्जाम में अपीयर होना पड़ता है. ये तर्क बेकार है कि private medical College महंगे हो जाएंगे. उनको फैकल्टी रख के स्टूडेंट्स नहीं मिल रहे. जिन मुद्दों पर बात होनी चाहिए कि मेडिकल कॉलेज महंगे क्यों हैं, पढाई का स्तर कैसा है, ये अलग और अहम मुद्दे हैं‌ लेकिन ये अलग अलग बातें हैं. पहले हम एक्सपर्ट और डाक्टर की संख्या तो बढाएं‌. यानी जो सीटें खाली रह जाती हैं पहले उन्हें तो भरे.

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