इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रसार ने अपराध की एक नई श्रेणी को जन्म दिया है, जिसे साइबर अपराध कहा जाता है। जैसे-जैसे व्यक्तिगत, वित्तीय और सरकारी गतिविधियां ऑनलाइन होती जा रही हैं, अपराधियों ने डिजिटल प्रणालियों का दुरुपयोग करने के नए तरीके खोज लिए हैं। यही कारण है कि साइबर अपराध आज की सबसे गंभीर कानूनी चुनौतियों में से एक बन गया है।
व्यापक रूप से देखा जाए तो साइबर अपराध से तात्पर्य ऐसे किसी भी गैरकानूनी कृत्य से है, जो कंप्यूटर, कंप्यूटर नेटवर्क या किसी डिजिटल उपकरण का उपयोग करके किया जाता है। इसमें कंप्यूटर या डिजिटल प्रणाली स्वयं अपराध का लक्ष्य हो सकती है, जैसे हैकिंग या डेटा चोरी, अथवा डिजिटल उपकरण अपराध को अंजाम देने का माध्यम हो सकता है, जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर स्टॉकिंग और पहचान की चोरी।
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भारत में इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 लागू है। इसमें हैकिंग, पहचान की चोरी, साइबर आतंकवाद और अश्लील सामग्री से संबंधित अपराधों को शामिल किया गया है। इसके साथ भारतीय न्याय संहिता डिजिटल माध्यम से की गई धोखाधड़ी, मानहानि और धमकी जैसे अपराधों से निपटती है। वहीं, भारतीय साक्ष्य अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अदालत में प्रमाणित करने और स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
जब कोई साइबर अपराध होता है, तो सामान्यतः इसकी शुरुआत शिकायत या एफआईआर से होती है, जिसे अक्सर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से दर्ज किया जाता है। इसके बाद विशेष साइबर सेल डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र करने का काम करती हैं। इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए उनकी पूरी कस्टडी चेन का रिकॉर्ड बनाया जाता है और फिर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाता है। आरोपी की पहचान होने के बाद आरोप-पत्र दाखिल किया जाता है और मामला अदालत में पहुंचता है, जहां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और विशेषज्ञों की गवाही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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जैसे-जैसे तकनीक लगातार विकसित हो रही है, वैसे-वैसे इसके दुरुपयोग से निपटने के लिए बनाए गए कानूनों और संस्थानों को भी विकसित होना होगा। जागरूक नागरिक, समय पर साइबर अपराध की रिपोर्टिंग और मजबूत जांच व्यवस्था मिलकर साइबर अपराध की लगातार बढ़ती दुनिया के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
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एडवोकेट अमित पी. पटेल
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court)
यह आर्टिकल गुजरात हाईकोर्ट के एडवोकेट अमित पी. पटेल द्वारा लिखा गया है।
