मंदसौर/नीमच/रतलाम (Yashasvi Duniya News): मध्य प्रदेश के मालवा अंचल के लोगों को अभी बारिश की झमाझम फुहारों के लिए थोड़ा और इंतज़ार करना होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है और मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री में देरी होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में मानसून 20 जून के आसपास ही दस्तक देगा। ऐसे में बारिश का फिलहाल कोई अलर्ट नहीं है। हालांकि, मालवा अंचल में मौसम का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। पड़ोसी राज्य राजस्थान से उठने वाली धूल भरी आंधी (Dust Storm) का सीधा असर मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों में महसूस किया जा रहा है।

मानसून में देरी: 20 जून के आसपास होगी मालवा में बारिश की शुरुआत

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मानसूनी सिस्टम इस बार कुछ धीमे आगे बढ़ रहे हैं। आमतौर पर मालवा क्षेत्र में 15 जून तक प्री-मानसून गतिविधियां और हल्की बारिश शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और शुष्क हवाओं के कारण मानसून के 20 जून के आसपास पहुंचने का अनुमान है। अभी किसी भी प्रकार की भारी बारिश, जलभराव या बाढ़ का कोई खतरा या अलर्ट नहीं है।

शिवना नदी और जल स्रोतों की स्थिति: क्योंकि अभी बारिश नहीं हो रही है, इसलिए मंदसौर की जीवनदायिनी शिवना नदी (Shivna River) में अभी पानी आने की कोई संभावना नहीं है। नदी और आसपास के नाले फिलहाल सूखे रहेंगे। गांधीसागर डैम (Gandhisagar Dam) के जलस्तर में भी मानसून की जोरदार बारिश के बाद ही इज़ाफा देखने को मिलेगा।

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राजस्थान की धूल भरी आंधी का मालवा में कहर

भले ही बारिश न हो रही हो, लेकिन तेज़ हवाओं ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। राजस्थान के थार मरुस्थल और सीमावर्ती इलाकों में उठे बवंडर और रेतीले तूफानों का असर अब मध्य प्रदेश की ओर खिसक आया है। मंदसौर, नीमच और रतलाम में पिछले कुछ दिनों से आसमान में धूल का गुबार छाया हुआ है।

धूल भरी आंधी के कारण दिन के समय भी धूप मद्धम पड़ गई है और दृश्यता (Visibility) काफी कम हो गई है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली इन हवाओं के कारण कच्ची छतों, टीन शेड और होर्डिंग्स के गिरने का खतरा बना हुआ है।

ज़िला (District) वर्तमान स्थिति (Current Status) हवा की गति (Wind Speed) प्रमुख प्रभाव (Main Impact)
मंदसौर (Mandsaur) धूल भरी आंधी (Dust Storm) 40-45 कि.मी./घंटा हाइवे पर कम दृश्यता, आँखों में जलन
नीमच (Neemuch) राजस्थान से सटी हवाओं का असर 45-50 कि.मी./घंटा धूल का गुबार, सांस लेने में परेशानी
रतलाम (Ratlam) तेज़ शुष्क हवाएं (Dry Strong Winds) 35-40 कि.मी./घंटा गर्मी का अहसास, धूल उडना
Source: IMD | Table Watermark by Yashasvi Duniya

कृषि और किसानों की स्थिति: चिंता की कोई बात नहीं

आमतौर पर आंधी-तूफान का नाम सुनते ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं, लेकिन इस समय राहत की बात यह है कि खेतों में फसलों का कोई नुकसान नहीं होने वाला है।

खेत पड़े हैं खाली: रबी सीज़न की फसलें (जैसे गेहूं, लहसुन, चना, और सरसों) काफी पहले कट चुकी हैं। वर्तमान में मालवा अंचल के अधिकांश खेत पूरी तरह से खाली पड़े हैं। किसान अभी केवल खरीफ सीज़न (सोयाबीन, मक्का) की बोवनी के लिए खेतों की साफ-सफाई और जुताई-बखरनी की तैयारियों में लगे हुए हैं। चूंकि खेतों में कोई खड़ी फसल नहीं है, इसलिए तेज़ हवा या आंधी से कृषि को कोई नुकसान नहीं होगा।

अनाज सुरक्षित स्थानों पर: खलिहानों में अब कोई भी उपज खुले में नहीं पड़ी है। किसानों ने अपनी मेहनत की उपज को सुरक्षित गोदामों (Warehouses) में जमा कर दिया है या फिर कृषि उपज मंडियों में बेच दिया है। जो थोड़ा-बहुत अनाज घरों में है, वह भी पूरी तरह से सुरक्षित है। ऐसे में किसानों को इस धूल भरी आंधी से आर्थिक तौर पर परेशान होने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है। मंडी भाव की अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें।

यातायात और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की ज़रूरत

भले ही फसलों को नुकसान न हो, लेकिन आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर इस आंधी का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है।

  • स्वास्थ्य (Health): हवा में उड़ते बारीक धूल के कणों (PM 2.5 और PM 10) के कारण अस्थमा और सांस के मरीजों को परेशानी हो सकती है। इसके अलावा आँखों में जलन और एलर्जी की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें और आँखों पर चश्मा लगाएं।
  • यातायात (Traffic): मंदसौर-नीमच फोरलेन और रतलाम से जुड़े स्टेट हाईवे पर तेज़ आंधी के कारण विज़िबिलिटी 500 मीटर से भी कम रह गई है। वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।

प्रशासन की अपील

मंदसौर, नीमच और रतलाम ज़िला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि बेवजह घर से बाहर न निकलें। चूंकि हवा तेज़ है, इसलिए दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, कच्चे मकानों या जर्जर इमारतों के आसपास खड़े होने से बचें।

मौसम के इस रुख से साफ है कि मालवा के लोगों को असली राहत 20 जून के बाद ही मिलेगी, जब झमाझम मानसूनी बारिश इस धूल और गर्मी को शांत करेगी। तब तक यशस्वी दुनिया आपसे अपील करता है कि स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सुरक्षित रहें। मौसम और रेलवे से जुड़ी पल-पल की ताज़ा अपडेट्स के लिए यशस्वी दुनिया (Yashasvi Duniya) को पढ़ते रहें।

रिपोर्टर: यशस्वी दुनिया न्यूज़ डेस्क
स्रोत (Sources): भारतीय मौसम विभाग (IMD), स्थानीय कृषि विभाग

कैलाश विश्वकर्मा