कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान बड़ा हादसा: मिट्टी ढहने से दो इंजीनियरों की दर्दनाक मौत
कोटा (यशस्वी दुनिया न्यूज़): राजस्थान के कोटा से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी के पास निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास (आरयूबी) का निरीक्षण करने पहुंचे दो इंजीनियरों की मिट्टी ढहने से मलबे में दबकर मौत हो गई। मृतकों की पहचान इंजीनियर प्रभात सिंह झा और पंकज कुमार झा के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया।
निरीक्षण के दौरान अचानक ढही मिट्टी
मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी क्षेत्र में रेलवे अंडरपास के निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। घटना के समय साइट पर काम करने वाले मजदूर अपने काम की पाली पूरी करके जा चुके थे। मौके पर केवल एलएंडटी (L&T) और जेसीबी मशीनें खड़ी थीं। दोनों इंजीनियर प्रभात सिंह झा और पंकज कुमार झा शाम को कार्यों का जायजा लेने और साइट के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मिट्टी की एक बहुत बड़ी ढांग भरभरा कर ढह गई और दोनों अधिकारी मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए।
घटनास्थल पर निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास का कार्य (फोटो: दैनिक भास्कर)
जेसीबी की मदद से 15 मिनट में निकाला बाहर, पर नहीं बच सकी जान
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस केवल 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई। कनवास के उपखंड अधिकारी (SDM) बाबूलाल मीणा ने बताया कि पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। साइट पर मौजूद जेसीबी और एलएंडटी मशीनों की मदद से मिट्टी हटाने का काम शुरू किया गया। महज 10 से 15 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों अधिकारियों को मिट्टी से बाहर निकाल लिया गया।
हालांकि, मलबे से बाहर निकाले जाने तक प्रभात झा की सांसें थम चुकी थीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पंकज झा गंभीर रूप से घायल थे। उन्हें नाजुक हालत में तत्काल कोटा के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे के बाद पूरे रेलवे और प्रशासनिक अमले में शोक की लहर दौड़ गई है।
मिट्टी ढहने के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटी मशीनें (फोटो: दैनिक भास्कर)
जाम की भीषण समस्या से मुक्ति के लिए बन रहा है यह अंडरपास
कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे-52 पर स्थित दरा घाटी में आए दिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से जनता को निजात दिलाने के लिए इस अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 9.98 करोड़ रुपए है। कंवलपुरा और दरा स्टेशन के बीच स्थित ब्रिज संख्या 148 के पास इस रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) के निर्माण के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विशेष प्रयासों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी थी।
दरा की नाल में अक्सर भारी वाहनों के फंसने के कारण 10 से 12 घंटे तक का लंबा जाम लग जाता है, खासकर बरसात के मौसम में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच का संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है। इस बड़ी समस्या के समाधान के रूप में यह आरयूबी मील का पत्थर साबित होने वाला है, लेकिन निर्माण के दौरान हुई इस त्रासदी ने सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे वाले स्थान पर ढही हुई मिट्टी का मंजर (फोटो: दैनिक भास्कर)
रेलवे की सुरक्षा तैयारियों और व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
दरा घाटी में हुए इस बड़े हादसे ने रेलवे और निर्माण एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की कलई खोल दी है। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इस संबंध में स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में रतलाम रेल मंडल द्वारा दुर्घटना प्रबंधन की तैयारियों को लेकर मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई थी, जिसमें आपातकालीन स्थितियों से निपटने के दावे किए गए थे, लेकिन निर्माण स्थलों पर जमीनी सुरक्षा व्यवस्थाएं आज भी बेहद कमजोर बनी हुई हैं। इसके अलावा दरा घाटी रेलवे खंड से संबंधित विकास कार्यों में पूर्व में डाउन लाइन पर आरएच गर्डर की सफल लॉन्चिंग भी की जा चुकी है, जिससे यह अंडरपास परियोजना काफी चर्चा में रही है।
कोटा रेल मंडल और पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
समाचार व चित्र साभार: यह खबर और इसमें प्रयुक्त तस्वीरें मूल रूप से दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) से साभार ली गई हैं।
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