नई दिल्ली/मंदसौर। इस बार गर्मी ने कैलेंडर नहीं देखा। अप्रैल का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ, लेकिन देश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 44 डिग्री के बीच पहुंच चुका है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक सूरज के तेवर इतने तीखे हो गए हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ दोनों एक साथ दिखाई देने लगे हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में जहां तापमान लगातार 42 डिग्री के आसपास बना हुआ है, वहीं दक्षिण भारत के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी गर्मी का असर तेज हो गया है। हालात ऐसे हैं कि अप्रैल में ही मई-जून जैसी परिस्थितियां बन गई हैं।

पूरे देश में बदलता मौसम का मिजाज
इस साल मौसम का पैटर्न साफ तौर पर बदला हुआ नजर आ रहा है। उत्तर भारत में जहां आमतौर पर अप्रैल के आखिर में गर्मी तेज होती है, इस बार उसकी शुरुआत मध्य अप्रैल से ही हो गई। राजस्थान के कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी पारा लगातार ऊपर बना हुआ है।
मध्य भारत, खासकर मंदसौर, नीमच, उज्जैन और इंदौर जैसे क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ा है। दोपहर में तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।
दक्षिण भारत में भी हालात अलग नहीं हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कर्नाटक और तमिलनाडु के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रही है इतनी गर्मी?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इस बार पश्चिमी विक्षोभ बहुत कम सक्रिय रहा, जिससे उत्तर भारत में बादल नहीं बन पाए। इसके चलते सूरज की सीधी किरणें जमीन को लगातार गर्म कर रही हैं।
इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। हर साल तापमान के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं और मौसम का चक्र धीरे-धीरे बदल रहा है। हवा की गति कम होने से गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है।
क्या है हीटवेव और कब होती है खतरनाक?
जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री ज्यादा हो जाता है और यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो उसे हीटवेव यानी लू की स्थिति माना जाता है। जब तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है, तो यह स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
फिलहाल देश के कई हिस्सों में जो हालात बन रहे हैं, उन्हें देखकर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में हीटवेव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जनजीवन पर सीधा असर
गर्मी का असर अब साफ तौर पर जनजीवन पर दिखने लगा है। उत्तर भारत के शहरों में दोपहर के समय बाजारों में भीड़ कम हो गई है। मजदूर और दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में किसान सुबह जल्दी काम शुरू कर रहे हैं और दोपहर होते ही खेत छोड़ने को मजबूर हैं। शहरों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है, जिससे कई जगहों पर कटौती की समस्या भी सामने आ रही है।
स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ा
अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, सिरदर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग इस गर्मी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
हीटवेव और लू से कैसे बचें?
इस भीषण गर्मी में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। विशेषज्ञ कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दे रहे हैं:
दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
अगर बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को ढककर रखें।
हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
दिनभर में पर्याप्त पानी पीते रहें।
नींबू पानी, छाछ और ORS का सेवन करें।
खाली पेट धूप में बाहर न निकलें।
ज्यादा देर तक धूप में खड़े रहने से बचें।
बच्चों को गर्मी से कैसे बचाएं?
गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर जल्दी होता है, इसलिए उनके लिए खास ध्यान जरूरी है:
बच्चों को दोपहर में बाहर खेलने न भेजें।
उन्हें बार-बार पानी और तरल पदार्थ दें।
हल्के और ढीले कपड़े पहनाएं।
स्कूल जाने वाले बच्चों के बैग में पानी की बोतल जरूर रखें।
छोटे बच्चों को कार या बंद कमरे में अकेला न छोड़ें।
लू लगने के लक्षण क्या हैं?
लू लगने की स्थिति को पहचानना बहुत जरूरी है। इसके मुख्य लक्षण हैं:
तेज बुखार या शरीर का तापमान बढ़ना।
सिरदर्द और चक्कर आना।
उल्टी या मिचली।
अत्यधिक पसीना या बिल्कुल पसीना न आना।
कमजोरी और बेहोशी।
लू लगने पर तुरंत क्या करें?
अगर किसी को लू लग जाए तो तुरंत ये कदम उठाने चाहिए:
व्यक्ति को तुरंत छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं।
शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े से पोंछें।
ठंडा पानी या ORS घोल पिलाएं।
सिर पर ठंडा कपड़ा रखें।
कच्चे आम का पना, प्याज का रस और बेल का शरबत फायदेमंद माना जाता है।
अगर हालत गंभीर हो तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी है।
दक्षिण और उत्तर भारत के लिए अलग सावधानी क्यों जरूरी?
उत्तर भारत में जहां सूखी और तेज लू चलती है, वहीं दक्षिण भारत में गर्मी के साथ नमी भी ज्यादा रहती है। ऐसे में दक्षिण भारत में शरीर जल्दी थकता है और पसीना ज्यादा आता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
उत्तर भारत में लू से बचाव जरूरी है, जबकि दक्षिण भारत में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना ज्यादा जरूरी होता है।
आने वाले समय के लिए चेतावनी
अप्रैल में ही जिस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है, वह साफ संकेत है कि मई और जून के महीने और ज्यादा कठिन हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल हीटवेव की अवधि लंबी हो सकती है।
ऐसे में जरूरी है कि लोग अभी से सतर्क हो जाएं और खुद के साथ-साथ अपने परिवार का भी ध्यान रखें।+

निष्कर्ष
गर्मी हर साल आती है, लेकिन इस बार उसका अंदाज बदला हुआ है। अप्रैल में ही मई-जून जैसी तपिश यह बता रही है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। यह सिर्फ एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।
अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह गर्मी सिर्फ असुविधा ही नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि हम सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और इस बदलते मौसम के साथ खुद को ढालें।