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मोदी का अमेरिका में जलवा संसद को संबोधित किया

11 months ago 0 4

धानमंत्री नरेंद्र मोदी कैपिटल हिल पहुंच चुके हैं और अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे हैं. इस दौरान भारतीय प्रवासी के सदस्य कैपिटल हिल के बाहर खड़े हैं, क्योंकि वे पीएम नरेंद्र मोदी के आगमन का इंतजार कर रहे थे. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूएस कैपिटल में प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष केविन मैकार्थी से मुलाकात की. वहीं यूएस कांग्रेस के स्पीकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी संसद में बोलते हुए कहा कि अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करना हमेशा एक बड़ा सम्मान होता है. ऐसा दो बार करना एक असाधारण विशेषाधिकार है. इस सम्मान के लिए मैं भारत की 1.4 अरब जनता के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं. मैं देख रहा हूं कि आप में से लगभग आधे लोग 2016 में यहां थे. मैं दूसरे आधे हिस्से में पुराने दोस्तों और नए दोस्तों का उत्साह भी देख सकता हूं. पीएम के संबोधन की मुख्य बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं यहां इस सदी के लिए अपने आह्वान के बारे में बात करने के लिए आया हूं. जिस लंबे रास्त पर हमने यात्रा की है, हमने दोस्ती की परीक्षा दी है. पहले जब मैं यहां आया था तब से बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन बहुत कुछ वैसा ही बना हुआ है. जैसे कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दोस्ती को गहरा करने की हमारी प्रतिबद्धता. पिछले कुछ सालों में AI, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काफी प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि AI का एक मतलब अमेरिका और भारत भी है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र हमारे पवित्र और साझा मूल्यों में से एक है. पूरे इतिहास में एक बात स्पष्ट रही है कि लोकतंत्र वह भावना है जो समानता और सम्मान का समर्थन करती है. लोकतंत्र वह विचार है जो बहस और चर्चा का स्वागत करता है. लोकतंत्र वह संस्कृति है जो विचार और अभिव्यक्ति को पंख देती है. भारत को प्राचीन काल से ही ऐसे मूल्यों का सौभाग्य प्राप्त है. लोकतांत्रिक भावना के विकास में भारत लोकतंत्र की जननी है. पीएम ने कहा कि पिछले साल भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किए हैं. हर मील का पत्थर महत्वपूर्ण है लेकिन यह विशेष है. हमने किसी न किसी रूप में हजारों वर्षों के विदेशी शासन के बाद अपनी 75 वर्षों की स्वतंत्रता की यात्रा का जश्न मनाया. यह सिर्फ लोकतंत्र का ही नहीं बल्कि विविधता का भी उत्सव था. प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका की स्थापना एक समान दृष्टिकोण वाले लोगों से प्रेरित थी. अपने पूरे इतिहास में, आपने दुनिया भर के लोगों को गले लगाया है और उन्हें अमेरिकी सपने में समान भागीदार बनाया है. यहां लाखों लोग हैं जिनकी जड़ें भारत में हैं, उनमें से कुछ यहां गर्व से बैठे हैं और एक मेरे पीछे हैं. हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा हैं. पिछली शताब्दी में जब भारत ने अपनी स्वतंत्रता हासिल की तो इसने कई अन्य देशों को औपनिवेशिक शासन से खुद को मुक्त करने के लिए प्रेरित किया. इस सदी में जब भारत बेंचमार्क स्थापित करेगा और विकास करेगा तो यह कई अन्य देशों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगा. हमारा विजन है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास. आज डिजिटल परफोरेंस गोपनीयता की रक्षा करते हुए लोगों के अधिकारों और सम्मान को सशक्त बना रही है. पिछले नौ वर्षों में एक अरब लोगों को उनके बैंक खातों और मोबाइल फोन से जुड़ी एक डिजिटल बायोमेट्रिक पहचान मिली है. यह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा हमें वित्तीय सहायता के साथ सेकंड के भीतर नागरिकों तक पहुंचने में मदद कर रहा है. 850 मिलियन लोगों को उनके खातों में सीधा वित्तीय हस्तांतरण प्राप्त होता है. वर्ष में तीन बार 100 मिलियन से अधिक किसानों को उनके बैंक खातों में सहायता प्राप्त हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे पास 2,500 से अधिक राजनीतिक दल हैं. भारत के विभिन्न राज्यों में लगभग 20 अलग-अलग पार्टियां शासन करती हैं. हमारी 22 आधिकारिक भाषाएं और हजारों बोलियां हैं, फिर भी हम एक स्वर में बोलते हैं. हमारा दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ है. हम बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हमने 150 मिलियन से अधिक लोगों को आश्रय प्रदान करने के लिए लगभग 40 मिलियन घर दिए हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या का लगभग 6 गुना है. हम एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम चलाते हैं जो लगभग 500 मिलियन लोगों के लिए निःशुल्क चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करता है. 9/11 और मुंबई में 26/11 हमले के एक दशक से भी अधिक समय के बाद भी अभी कट्टरवाद और आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए एक खतरा बना हुआ है. ये विचारधाराएं नई पहचान और नया रूप लेती रहती हैं लेकिन इनके इरादे वही हैं. आतंकवाद मानवता का दुश्मन है और इससे निपटने में कोई किंतु-परंतु नहीं हो सकता. हमें आतंक को प्रायोजित करने वाली ऐसी सभी ताकतों पर काबू पाना होगा. यूक्रेन युद्ध से इलाके में बड़ी पीड़ा देखने को मिली है. यूक्रेन से यूरोप की ओर युद्ध वापस लौटा है. ग्लोबल साउथ के देश खासकर प्रभावित हुए हैं. युद्ध से लोगों को पीड़ा पहुंचती है. उन्होंने कहा कि ये वक्त युद्ध का नहीं है. बातचीत से समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए.

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