रतलाम/मंदसौर। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के अंतर्गत नीमच-रतलाम दोहरीकरण परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। मंदसौर से दलोदा के बीच लगभग 14 किलोमीटर लंबे रेलपथ के दोहरीकरण का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। अब इस नए रेलपथ की सुरक्षा और क्षमता की जांच के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा गति परीक्षण (Speed Trial) और सीआरएस निरीक्षण की तैयारी की जा रही है।

रतलाम मंडल की बड़ी उपलब्धि: 14 किमी रेलपथ तैयार
नीमच-रतलाम दोहरीकरण कार्य के अंतर्गत मंदसौर-दलोदा रेल खंड (किलोमीटर 291.205 से 304.367) के मध्य दोहरीकरण का कार्य पूरा होना क्षेत्र के लिए बड़ी राहत की खबर है। इससे न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि यातायात में होने वाली देरी में भी कमी आएगी। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी श्री मुकेश कुमार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह परियोजना क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है।
6 से 8 मई तक होगा ‘गति परीक्षण’ (Speed Trial)
नवीन रेलपथ के निर्माण के उपरांत उसकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘गति परीक्षण’ एक अनिवार्य प्रक्रिया है। रेलवे प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, मंदसौर-दलोदा खंड पर यह गति परीक्षण 06 मई 2026 से 08 मई 2026 तक निर्धारित समयावधि में किया जाएगा। इस दौरान रेल इंजन और कोचों को उच्च गति पर चलाकर ट्रैक की गुणवत्ता की जांच की जाएगी।
⚠️ सुरक्षा चेतावनी: स्पीड ट्रायल के दौरान पटरियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
सुरक्षा के लिए रेलवे की सख्त चेतावनी
गति परीक्षण के दौरान संभावित दुर्घटनाओं और जनहानि से बचने के लिए रेलवे प्रशासन ने आम जनता के लिए सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। रेलवे ने अपील की है कि:
- मंदसौर-दलोदा रेल खंड के मध्य 06 मई से 08 मई तक रेलपथ से उचित दूरी बनाए रखें।
- न तो स्वयं रेलपथ के पास जाएं और न ही अपने बच्चों को जाने दें।
- अपने पशुधन (गाय, भैंस, बकरी आदि) को रेल की पटरियों के आसपास न जाने दें, क्योंकि उच्च गति से चलने वाली ट्रेनों से दुर्घटना की प्रबल संभावना रहती है।
अधिकृत मार्गों का ही करें उपयोग
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि गति परीक्षण की अवधि के दौरान पटरियों को पार करना जानलेवा हो सकता है। सुरक्षित आवागमन के लिए केवल अधिकृत समपार फाटक (Railway Crossings) या रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) का ही उपयोग करें। नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
नीमच-रतलाम दोहरीकरण: भविष्य की राह
नीमच-रतलाम खंड का दोहरीकरण होने से यह मार्ग दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल लाइन के लिए एक महत्वपूर्ण फीडर के रूप में काम करेगा। वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे यात्रियों का समय बर्बाद होता था। दोहरीकरण पूरा होने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की परिचालन क्षमता में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सीआरएस निरीक्षण की अहमियत
गति परीक्षण के साथ-साथ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) द्वारा भी इस खंड का सूक्ष्म निरीक्षण किया जाएगा। सीआरएस की मंजूरी के बाद ही इस नए रेलपथ पर नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकेगा। यह निरीक्षण रेल सुरक्षा मानकों की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
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