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February 26, 2026 4:20 am

बगीचा योजना के नाम पर ठगी, किसानों से धोखाधड़ी शामगढ़ में मामला दर्ज

बगीचा योजना के नाम पर लाखों की ठगी, किसानों से धोखाधड़ी का मामला दर्ज

शामगढ़ थाना क्षेत्र में किसानों के साथ बगीचा लगाने के नाम पर ठगी करने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने इस प्रकरण में कई आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है। मामला धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा 420 और 120बी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दर्ज किया गया है। घटना का अपराध क्रमांक 57/26 है, जिसकी रिपोर्ट 24 फरवरी 2026 को दर्ज की गई

बगीचा योजना के नाम पर लाखों की ठगी, किसानों से धोखाधड़ी का मामला दर्ज

एक साल तक चलता रहा ठगी का खेल

पुलिस सूत्रों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम 1 जनवरी 2025 से 1 नवंबर 2025 के बीच का बताया जा रहा है। इस अवधि में आरोपियों ने क्षेत्र के किसान को बगीचा विकसित करने की योजना का झांसा दिया। किसान को भरोसा दिलाया गया कि वे उन्नत तकनीक से फलदार पौधों का बगीचा लगवाएंगे, जिससे उन्हें भविष्य में अच्छा मुनाफा होगा।

इसी लालच और विश्वास के आधार पर किसानों से बड़ी रकम ली गई। लेकिन तय समय सीमा में न तो बगीचा लगाया गया और न ही पैसा वापस किया गया। जब किसानों को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस की शरण ली।

फरियादी पंकज राठौड़ ने दर्ज कराई शिकायत

इस मामले में फरियादी पंकज पिता रामचंद्री राठौड़, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम मेलखेड़ा ने थाना शामगढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पंकज राठौड़ का आरोप है कि आरोपियों ने उनसे और अन्य किसानों से बगीचा लगाने के नाम पर रकम ली और बाद में संपर्क तोड़ लिया।

फरियादी के अनुसार, उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि आधुनिक पद्धति से आम, अमरूद और अन्य फलदार पौधों का बगीचा विकसित किया जाएगा। इसके लिए अग्रिम राशि ली गई, लेकिन कार्य शुरू ही नहीं हुआ। कई बार संपर्क करने के बावजूद आरोपियों ने टालमटोल की और अंततः फोन उठाना भी बंद कर दिया।

इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

पुलिस द्वारा जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें प्रमुख रूप से—
योगेश पिता आनंद प्रकाश, निवासी चमिला जिला मथुरा,कृष्ण कुमार पिता ठाकुर राम, निवासी कांटालिया पाली, राजस्थान, लोकेश पिता रामगोपाल बैरवा, निवासी उम्मेदगंज नरसिंहपुर की झोपड़ी, थाना अटरू, जिला बारा राजस्थान,प्रवीण उपाध्याय, निवासी मथुरा ,यतेन्द्र उर्फ जितेन्द्र कश्यप, निवासी मथुरा
साथ ही अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह की तरह कार्य कर रहा था और अलग-अलग जिलों व राज्यों के लोगों को शामिल कर किसानों को निशाना बनाया गया।

संगठित साजिश की आशंका

धारा 120बी के तहत मामला दर्ज होने से यह स्पष्ट है कि पुलिस इस पूरे प्रकरण को आपराधिक षड्यंत्र मान रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से किसानों को भरोसे में लिया। पहले खेतों का निरीक्षण किया गया, फिर लागत और संभावित लाभ का विस्तृत ब्यौरा दिया गया। किसानों को यह भी बताया गया कि सरकारी योजनाओं से सब्सिडी दिलवाई जाएगी।
कुछ किसानों को प्रारंभ में नकली दस्तावेज और अनुबंध भी दिए गए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि यह एक वैध और पंजीकृत योजना है। बाद में जब भुगतान हो गया तो काम शुरू नहीं किया गया।

कितनी राशि की ठगी?

हालांकि पुलिस ने अभी तक कुल ठगी की गई राशि का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह रकम लाखों में हो सकती है। ग्राम मेलखेड़ा सहित आसपास के गांवों के कई किसान इस ठगी के शिकार हुए हैं। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी और कर्ज लेकर राशि दी थी।

पुलिस जांच में जुटी

थाना शामगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मोबाइल नंबरों के आधार पर लोकेशन ट्रेस की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। चूंकि कुछ आरोपी राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं, इसलिए संबंधित जिलों की पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि अन्य किसान भी इस तरह की ठगी का शिकार हुए हैं तो वे आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य एकत्रित किए जा सकें।

किसानों में आक्रोश

घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है, ऊपर से इस तरह की ठगी ने उनकी कमर तोड़ दी है। कई किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाई जाए।

विशेषज्ञों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को किसी भी निजी एजेंसी या व्यक्ति को बड़ी राशि देने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करनी चाहिए। संबंधित विभाग से पुष्टि किए बिना किसी योजना में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि अनुबंध करते समय लिखित समझौता, पंजीकरण प्रमाण और सरकारी स्वीकृति की प्रतियां अवश्य जांच लें।

प्रशासन की अपील

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की निवेश योजना या कृषि परियोजना में धन लगाने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। यदि कोई व्यक्ति असामान्य लाभ का लालच देकर धन मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी थाना या साइबर सेल को दें।

निष्कर्ष

शामगढ़ में सामने आया यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय ठग गिरोहों की बढ़ती गतिविधियों की ओर संकेत करता है। बगीचा लगाने जैसे लाभकारी और आकर्षक प्रस्ताव के माध्यम से किसानों को निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है।

अब देखना होगा कि पुलिस जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं और कब तक आरोपियों की गिरफ्तारी होती है। फिलहाल पीड़ित किसान न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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