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March 28, 2026 1:19 am

स्कूलों में ही बनेंगे और अपडेट होंगे आधार कार्ड: 1 अप्रैल से शुरू होगा विशेष अभियान

मंदसौर/भोपाल, 27 मार्च 2026। मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा केन्द्र ने एक अहम पहल शुरू की है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सहयोग से ‘विद्यार्थियों के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार’ अभियान का अगला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आधार से जुड़ी सभी सेवाएं सीधे उनके विद्यालय परिसर में ही उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें नामांकन या अपडेट के लिए बाहर न जाना पड़े।

स्कूलों में ही बनेंगे और अपडेट होंगे आधार कार्ड: 1 अप्रैल से शुरू होगा विशेष अभियान

यह अभियान पहले भी सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। 18 अगस्त से 31 अक्टूबर 2025 के बीच दो चरणों में आयोजित इस कार्यक्रम में लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिला था। अब इसके अगले चरण को और व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक छात्र लाभान्वित हो सकें।

15 मई तक चलेगा अभियान, स्कूलों में ही मिलेंगी सभी सेवाएं

अभियान 1 अप्रैल से शुरू होकर 15 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में विशेष आधार शिविर लगाए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों के आधार कार्ड से जुड़े नामांकन और बायोमेट्रिक अपडेट जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे छात्रों और अभिभावकों को लंबी कतारों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

स्कूल स्तर पर ही आधार सेवाएं उपलब्ध कराने से खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को बड़ी सुविधा मिलेगी। कई बार ऐसे क्षेत्रों में आधार अपडेट के लिए केंद्र दूर होने के कारण बच्चे समय पर अपना अपडेट नहीं करा पाते थे, जिससे उन्हें शैक्षणिक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती थी।

500 से अधिक ऑपरेटर्स की तैनाती

इस अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य स्तर पर 500 से अधिक प्रशिक्षित ऑपरेटर्स का चयन किया गया है। ये ऑपरेटर्स स्कूलों में जाकर आधार अपडेट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। इसके अलावा स्कूलों के प्राचार्यों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे यूडीआईएसई-प्लस पोर्टल पर उन विद्यार्थियों की सूची अपडेट करें, जिनके आधार में बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है।

स्कूल प्रशासन को यह भी कहा गया है कि ऐसे छात्रों को जागरूक करें और उनके लिए एक तय रोस्टर बनाकर समय पर अपडेट सुनिश्चित करें। इससे प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी बनी रहेगी।

बायोमेट्रिक अपडेट क्यों है जरूरी?

स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल खासतौर पर बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पर केंद्रित है। आधार कार्ड में बायोमेट्रिक जानकारी जैसे उंगलियों के निशान, आइरिस स्कैन और फोटो समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होता है।

पहला बायोमेट्रिक अपडेट तब आवश्यक होता है जब बच्चा 5 वर्ष की आयु पूरी करता है। इसके बाद दूसरा अपडेट 15 वर्ष की आयु में किया जाता है। यदि 15 से 17 वर्ष की आयु के बीच यह अपडेट कराया जाता है, तो यह निःशुल्क होता है, लेकिन 17 वर्ष के बाद इसके लिए शुल्क देना पड़ता है।

बायोमेट्रिक अपडेट न होने पर कई बार आधार कार्ड निष्क्रिय जैसा हो जाता है, जिससे छात्रों को विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है।

शिक्षा और सरकारी योजनाओं में आधार की भूमिका

आज के समय में अपडेटेड आधार कार्ड छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। स्कूल में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने, छात्रवृत्ति प्राप्त करने और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार जरूरी है।

विशेष रूप से एनटीए, यूपीएससी, जेईई और नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं के लिए आवेदन करते समय आधार से लिंक मोबाइल नंबर और सही बायोमेट्रिक जानकारी आवश्यक होती है। परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए भी आधार का उपयोग किया जाता है।

अपार आईडी बनाने में भी मिलेगा फायदा

सरकार विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत अपार आईडी बनाने का लक्ष्य भी लेकर चल रही है। अपार आईडी एक डिजिटल पहचान है, जिसमें छात्र के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड जैसे मार्कशीट, ग्रेड शीट, डिग्री, डिप्लोमा और अन्य उपलब्धियां सुरक्षित रहती हैं।

यह आईडी छात्रों को उनके पूरे शैक्षणिक जीवन में एक स्थायी पहचान प्रदान करती है। अपार आईडी बनाने के लिए यह जरूरी है कि स्कूल के यूडीआईएसई-प्लस पोर्टल में दर्ज छात्र का नाम और आधार कार्ड में दर्ज नाम एक समान हो। इसलिए आधार अपडेट की प्रक्रिया इस दिशा में भी अहम भूमिका निभाती है।

पहले चरण में मिला था जबरदस्त प्रतिसाद

इस अभियान के पहले चरण में मध्यप्रदेश के 2000 से अधिक स्कूलों में शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में करीब 15 लाख विद्यार्थियों ने अपने आधार में बायोमेट्रिक अपडेट कराया था। इससे यह साफ हुआ कि इस पहल की आवश्यकता और उपयोगिता दोनों ही बहुत अधिक हैं।

पहले चरण की सफलता को देखते हुए ही सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस बार प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक स्कूलों और छात्रों को इस अभियान से जोड़ा जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत

ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए यह अभियान किसी राहत से कम नहीं है। पहले आधार अपडेट के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर केंद्रों तक जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी।

अब स्कूल में ही यह सुविधा मिलने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शिक्षा से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं भी सुचारू रूप से चल सकेंगी। इससे स्कूल ड्रॉपआउट दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

प्रशासन की अपील

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय पर आधार अपडेट कराएं। साथ ही स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें और सभी पात्र छात्रों का अपडेट सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष

‘विद्यार्थियों के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार’ अभियान शिक्षा और डिजिटल पहचान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल छात्रों को सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें भविष्य की शैक्षणिक और सरकारी प्रक्रियाओं के लिए तैयार भी करेगा। समय पर आधार अपडेट होने से छात्रों को किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे अपने लक्ष्य की ओर बिना रुकावट आगे बढ़ सकेंगे।

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