
देश की सबसे लंबी परिवहन सुरंग का निर्माण, उत्तराखंड के भविष्य की नई इबारत
देहरादून/ऋषिकेश।
16 अप्रैल 1853 — जब पहली बार भारत में रेलगाड़ी चली थी।
16 अप्रैल 2025 — जब भारत की अब तक की सबसे लंबी परिवहन सुरंग का ब्रेकथ्रू हुआ।
इतिहास जैसे एक ही तारीख पर दो बार मुस्कराया, और यह इत्तेफ़ाक नहीं, एक विराट इरादे की दस्तक थी।
उत्तराखंड की पवित्र वादियों में, जहां हवा भी देवताओं का नाम लेती है, वहीं देवप्रयाग और जानसू के बीच 14.58 किमी लंबी जानसू सुरंग (टनल T-8) अब सिर्फ एक तकनीकी चमत्कार नहीं, बल्कि भारत के संकल्प, उत्तराखंड के सपनों और श्रमिकों की साँसों की धड़कन बन चुकी है।

🌄 जानसू सुरंग: पहाड़ों के सीने को चीरकर बनी उम्मीद की रेखा
जहां एक ओर ऊँचे हिमालय हैं, दूसरी ओर हजारों फीट नीचे अंधेरे चट्टानी गलियारों में TBM मशीनें धड़क रही थीं, मज़दूरों की हथौड़ी गूंज रही थी और इंजीनियरों की आंखों में नींद की जगह ब्लूप्रिंट था।
और आज, जब उस सुरंग का आखिरी पत्थर टूटा — तो यह सिर्फ चट्टान नहीं टूटी, बल्कि एक मिथक टूटा कि रेल पहाड़ों पर नहीं चढ़ सकती।

🏗️ तकनीक और तपस्या का संगम
इस सुरंग का निर्माण किसी चमत्कार से कम नहीं।
- जर्मनी से मंगवाई गई टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने 10.4 किमी तक खुदाई की
- पारंपरिक NATM तकनीक से शेष 4.1 किमी सुरंग बनाई गई
- 800 मीटर तक गहराई में काम हुआ, जहां पानी 2000 लीटर प्रति मिनट तक रिसता था
- चट्टानों की परतों ने कई बार रास्ता रोका, लेकिन कभी हौसले नहीं टूटे

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रेकथ्रू के क्षण पर कहा —
“आज की तारीख केवल एक इंजीनियरिंग की जीत नहीं है, यह भारत के आत्मनिर्भर सपने की सजीव तस्वीर है।”
👷♂️ हर हथौड़ी की चोट में था भविष्य का स्वर
इन सुरंगों में काम करने वाले श्रमिकों की कहानियाँ किसी महाकाव्य से कम नहीं।
- कुछ ने दिवाली सुरंग में मनाई, कुछ ने ईद खुदाई करते हुए बिताई
- कुछ मजदूरों के बच्चे कभी रेलवे स्टेशन नहीं देख पाए, लेकिन उनके पिता ने सुरंग बना डाली
- गर्मी, सर्दी, भूस्खलन, अंधेरा — हर परिस्थिति को पराजित किया गया
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा —
“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि रेल हर गांव तक पहुंचे। आज उस सपने में उत्तराखंड की गूंज है।”
🗺️ परियोजना की प्रमुख झलकियाँ
- परियोजना का नाम: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन
- कुल लंबाई: 125.20 किमी
- सुरंगों की कुल लंबाई: 213.57 किमी
- प्रमुख सुरंग T-8: 14.58 किमी (देश की सबसे लंबी परिवहन सुरंग)
- निर्माण प्रगति: 195 किमी सुरंगों का कार्य पूर्ण
- प्रमुख पुल पूर्ण: 8, शेष 11 पर कार्य प्रगति पर
- रोड ओवर ब्रिज (ROB), रोड अंडर ब्रिज (RUB): सभी पूर्ण
- लक्ष्य: 2026-27 तक पूरी परियोजना चालू करना
🌧️ विकास की राह में चुनौतियाँ भी आईं, लेकिन हौसले कहीं नहीं डिगे
- मानसून में बार-बार हुए भूस्खलन
- तीर्थ यात्रा सीज़न में ट्रैफिक का दबाव
- सीमित लॉजिस्टिक सपोर्ट, संकरी सड़कों पर मशीनों की ढुलाई
- जल रिसाव, उच्च ओवरबर्डन, और पत्थरों की जटिलता
लेकिन इन सबके बावजूद, टीमवर्क, प्लानिंग और स्थानीय लोगों के सहयोग से परियोजना कभी रुकी नहीं। हर चुनौति एक सीढ़ी बनती गई।
✨ जानसू सुरंग: अब सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान
आज जब कोई तीर्थ यात्री ट्रेन से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा करेगा, तो वह सिर्फ दूरी नहीं नापेगा — वह एक संघर्ष की गहराई, परिश्रम की ऊँचाई और भविष्य की उड़ान को महसूस करेगा।
यह सुरंग भारत के नए युग की, आत्मनिर्भर भारत की, और “रेल पहाड़ पर नहीं चल सकती” जैसी धारणाओं के अंत की घोषणा है।